उत्तर प्रदेश कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान में उत्तर प्रदेश फायर सर्विसेज के महानिदेशक (डीजी) के पद पर कार्यरत सुजीत पांडेय को भारत सरकार ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें देश की सर्वोच्च पुलिस प्रशिक्षण संस्था सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA), हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उनके लंबे और विशिष्ट पुलिस सेवा करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही वह देशभर के भावी आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण का नेतृत्व करेंगे।
Appointments Committee of the Cabinet (ACC) ने गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है। निदेशक के रूप में सुजीत पांडेय भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के प्रशिक्षु अधिकारियों के आधारभूत प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास कार्यक्रमों तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए आयोजित उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सुजीत पांडेय वर्तमान में उत्तर प्रदेश फायर सर्विसेज के महानिदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक अधिकारी प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 1 अगस्त 1968 को बिहार के पटना में हुआ था। उनके पिता नरेंद्र कुमार पांडेय बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। इतिहास विषय में एम.ए. करने के बाद उन्होंने 4 सितंबर 1994 को उत्तर प्रदेश कैडर के नियमित भर्ती (Regular Recruit) आईपीएस अधिकारी के रूप में भारतीय पुलिस सेवा जॉइन की।
तीन दशक से अधिक लंबे सेवा काल में उन्होंने पुलिस प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 1996 में उनकी सेवा की पुष्टि हुई, 1998 में उन्हें वरिष्ठ वेतनमान मिला, 2007 में चयन ग्रेड प्रदान किया गया, 2009 में वह उप महानिरीक्षक (DIG), 2013 में पुलिस महानिरीक्षक (IG), 2019 में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) बने और 1 दिसंबर 2025 को उन्हें महानिदेशक (DG) के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को उन्होंने उत्तर प्रदेश फायर सर्विसेज के महानिदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
अपने सेवा काल के दौरान सुजीत पांडेय ने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन, खुफिया तंत्र और विशेष अभियानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने गाजीपुर, फतेहपुर, मैनपुरी, मऊ, मुरादाबाद, वाराणसी और बुलंदशहर सहित कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में कार्य किया। वर्ष 1998 में वह लखनऊ में एसपी सिटी भी रहे, जहां उन्होंने शहरी पुलिस व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और संगठित अपराध के विरुद्ध कई अभियानों का हिस्सा रहे। इसके अलावा वह लखनऊ और वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण शहरों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। फील्ड पुलिसिंग के साथ-साथ उन्हें रणनीतिक पुलिसिंग और खुफिया आधारित अभियानों का व्यापक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने लगभग सात वर्षों तक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में भी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने कई संवेदनशील मामलों की जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं।
पदोन्नति के बाद उन्होंने मेरठ और आगरा जोन में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के रूप में कार्य किया। 4 फरवरी 2018 से 7 जनवरी 2019 तक वह लखनऊ रेंज के आईजी रहे, जहां उनके प्रशासनिक नेतृत्व और प्रभावी पुलिसिंग की व्यापक सराहना हुई। 1 जनवरी 2019 को उन्हें एडीजी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस महानिदेशक के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में कार्य किया और 26 अगस्त 2019 को प्रयागराज जोन के एडीजी नियुक्त किए गए। बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश फायर सर्विसेज की कमान सौंपी गई, जहां उन्होंने अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।
उत्कृष्ट सेवा के लिए सुजीत पांडेय को अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें पुलिस मेडल (2010), डीजी कमेंडेशन डिस्क (सिल्वर) 2015, डीजी कमेंडेशन डिस्क (गोल्ड) 2018, उत्कृष्ट सेवा पदक तथा डीजी कमेंडेशन डिस्क (प्लैटिनम) 2019, राष्ट्रपति पुलिस पदक (PSM) 2024 और अति उत्कृष्ट सेवा पदक 2025 शामिल हैं।
सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी देश में आईपीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण की सर्वोच्च संस्था है। यहां प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों को आधारभूत प्रशिक्षण देने के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नेतृत्व विकास, आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध, आतंकवाद-रोधी रणनीति, आपराधिक जांच, मानवाधिकार, फोरेंसिक विज्ञान और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
सुजीत पांडेय की यह नियुक्ति उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और पेशेवर दक्षता की महत्वपूर्ण पहचान मानी जा रही है। पुलिसिंग, विशेष जांच, संस्थागत नेतृत्व और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उनका अनुभव देश की शीर्ष पुलिस प्रशिक्षण अकादमी को और अधिक सशक्त बनाने तथा भावी आईपीएस नेतृत्व को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
