Capillary Technologies की एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी में डीपफेक, फर्जी हस्ताक्षर और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए करीब €3 मिलियन का साइबर फ्रॉड हुआ।

Capillary Technologies की सब्सिडियरी में €3 मिलियन (₹32.7 करोड़) का साइबर फ्रॉड, ₹4.5 लाख की रिकवरी

Team The420
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सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस (SaaS) कंपनी Capillary Technologies ने खुलासा किया है कि उसकी एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी साइबर-आधारित बैंकिंग फ्रॉड का शिकार हुई है, जिसमें लगभग €3 मिलियन (करीब ₹32.7 करोड़) की धोखाधड़ी की गई। कंपनी के अनुसार इस रकम में से अब तक लगभग €450,000 (करीब ₹4.5 करोड़) की रिकवरी कर ली गई है।

कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया गया कि यह साइबर फ्रॉड अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके अंजाम दिया गया, जिसमें डीपफेक, फर्जी हस्ताक्षर और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान की नकल की गई। इसी धोखाधड़ी के माध्यम से राशि को एक अनधिकृत बैंक खाते में ट्रांसफर कराया गया।

रिपोर्ट के अनुसार यह घटना हाल ही में जुलाई की शुरुआत से ठीक पहले सामने आई, जिसके बाद कंपनी ने तुरंत कानूनी और तकनीकी कार्रवाई शुरू की। प्रभावित खातों को फ्रीज कराने और संबंधित बैंक खातों की जांच के लिए कंपनी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और साइबर क्राइम अधिकारियों के साथ समन्वय किया है।

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कंपनी ने बताया कि शुरुआती कार्रवाई के बाद कुछ अतिरिक्त संदिग्ध खातों की पहचान की गई है और उन्हें भी होल्ड पर रखा गया है, जिससे संभावित नुकसान को और बढ़ने से रोका जा सका है।

इस साइबर हमले के बावजूद कंपनी का कहना है कि उसके ग्राहक डेटा और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। साथ ही, सब्सिडियरी साइबर और क्राइम इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर थी, जिसकी सीमा और रिकवरी क्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है।

इस घटना के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एंटरप्राइज सिस्टम्स में अब डीपफेक और AI आधारित फर्जीवाड़े एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं, जिसमें मानव पहचान की नकल कर वित्तीय लेनदेन को अंजाम दिया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमलों में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि साइबर अपराधी तकनीकी सुरक्षा से ज्यादा मानव विश्वास और संगठनात्मक प्रक्रियाओं को निशाना बनाते हैं, जिससे बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड आसानी से अंजाम दिए जा सकते हैं।

कंपनी ने यह भी बताया कि पिछले कुछ महीनों में अधिग्रहण गतिविधियों के चलते उसका वैश्विक विस्तार बढ़ा है, और इसी दौरान यह साइबर घटना सामने आई है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल ट्रांजैक्शन और AI-आधारित धोखाधड़ी के बीच कंपनियों को अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह के बड़े वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।

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