केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तर रेलवे से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर रेलवे के एक अधिकारी, एक वरिष्ठ क्लर्क और एक निजी कंपनी से जुड़े व्यक्ति सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने नई दिल्ली स्थित बड़ौदा हाउस में उत्तर रेलवे के कार्यालय के अलावा गाजियाबाद, बुलंदशहर और कानपुर में आरोपियों से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर भी छापेमारी की, जहां से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नरेंद्र सिंह, लेनिन शर्मा और शारिक अली के रूप में हुई है। सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में इन तीनों के अलावा शुभाशीष मैती और एजाज अली को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि रेलवे अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर एक निजी कंपनी को रेलवे के टेंडरों से संबंधित गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई, जिससे कंपनी को निविदा प्रक्रिया में अनुचित लाभ मिल सके। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले का सत्यापन किया और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच शुरू की।
सीबीआई का दावा है कि जांच के दौरान जाल बिछाकर आरोपियों को ₹1 लाख की कथित रिश्वत का लेनदेन करते हुए पकड़ा गया। एजेंसी के अनुसार, रिश्वत की यह राशि रेलवे की खरीद प्रक्रिया से जुड़े कथित लाभ के बदले दी जा रही थी।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसी वर्ष अप्रैल में मैश इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में रेलवे के लिए सेफ्टी शूज की खरीद का आदेश जारी किया गया था। आरोप है कि इस खरीद आदेश के एवज में संबंधित अधिकारियों ने रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई के अनुसार, इस कथित लेनदेन के लिए एजाज अली को दिल्ली भेजा गया था।
कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी लेकर कंप्यूटर, मोबाइल फोन, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच के माध्यम से कथित रिश्वतखोरी, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी खरीद और ई-टेंडरिंग प्रक्रियाओं में गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा तथा डिजिटल निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संवेदनशील खरीद प्रक्रियाओं में डेटा एक्सेस की नियमित ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण भ्रष्टाचार की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच जारी है और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
