दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट पर प्रभावी रोक लगाने तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्य में दूध की पूरी आपूर्ति श्रृंखला के लिए सख्त अनुपालन मानक लागू कर दिए हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत दूध की गुणवत्ता, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
एफडीए के अनुसार, बिना पंजीकरण या लाइसेंस के संचालन, दूध में मिलावट, भ्रामक दावे, झूठे विज्ञापन और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। विभाग का कहना है कि सख्त दंड का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
प्रशासन ने बताया कि पहले अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग अनुपालन आदेश लागू थे, लेकिन अब दूध और दुग्ध उत्पादों से जुड़े पूरे तंत्र के लिए सभी नियमों को एकीकृत कर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इससे उद्योग के सभी स्तरों पर खाद्य सुरक्षा मानकों का एक समान पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत दूध संग्रह केंद्र, चिलिंग यूनिट, पाश्चुरीकरण और होमोजेनाइजेशन संयंत्र, अल्ट्रा हाई टेम्परेचर (यूएचटी) प्रोसेसिंग इकाइयां, पैकेजिंग और फिलिंग स्टेशन, थोक एवं खुदरा विक्रेता, ढीला दूध बेचने वाले कारोबारी, स्वचालित दूध वेंडिंग मशीन संचालक, दुग्ध उत्पाद निर्माता तथा खुदरा विक्रेता सभी नए नियमों के दायरे में आएंगे। यानी खेत से लेकर उपभोक्ता की मेज तक पूरी सप्लाई चेन पर अब समान निगरानी और अनुपालन व्यवस्था लागू रहेगी।
एफडीए ने बताया कि नए नियम लागू करने से पहले दूध उत्पादकों और उद्योग से जुड़े विभिन्न प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं। इस दौरान खाद्य सुरक्षा कानूनों, स्वच्छता मानकों और आवश्यक सावधानियों के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि उद्योग समय रहते आवश्यक सुधार लागू कर सके और नए मानकों का पालन सुनिश्चित हो।
अनुपालन आदेशों के अनुसार सभी प्रतिष्ठानों को नियमित रूप से हैजार्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट (एचएसीसीपी) आधारित जोखिम मूल्यांकन करना होगा तथा समय-समय पर उसका रिकॉर्ड अद्यतन रखना होगा। इसके साथ ही खाद्य-ग्रेड स्टेनलेस स्टील के उपकरणों का उपयोग, आसानी से साफ किए जा सकने वाले स्टोरेज टैंक और प्रभावी कीट नियंत्रण प्रणाली लागू करना भी अनिवार्य किया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वच्छता और गुणवत्ता से जुड़े सभी दस्तावेज एवं रिकॉर्ड सुरक्षित रखना आवश्यक होगा ताकि निरीक्षण के दौरान उनकी जांच की जा सके। एफडीए नियमित निरीक्षण और निगरानी अभियान के माध्यम से नए मानकों के पालन की समीक्षा करेगा और उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि हाल के निरीक्षणों में कुछ प्रतिष्ठानों द्वारा फर्जी पेस्ट कंट्रोल प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के मामले सामने आए थे। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने चेतावनी दी है कि झूठे दस्तावेज, फर्जी प्रमाणपत्र या भ्रामक जानकारी देने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दूध दैनिक उपभोग की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुओं में शामिल है। ऐसे में उसकी गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। दूध में मिलावट या अस्वच्छ परिस्थितियों में प्रसंस्करण से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए उत्पादन, भंडारण, परिवहन और वितरण के प्रत्येक चरण में वैज्ञानिक एवं स्वच्छ प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है।
एफडीए को उम्मीद है कि नए अनुपालन मानकों और कड़े दंड प्रावधानों से दूध एवं दुग्ध उत्पाद क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ेगी, मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। विभाग ने सभी लाइसेंसधारकों और कारोबारियों से नए नियमों का पूर्ण पालन करने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है।
