हिमाचल प्रदेश के मनाली में सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सहायक गैरीसन इंजीनियर के.के. सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक ठेकेदार के लंबित बिल पास कराने के बदले ₹93 हजार की रिश्वत मांगने और उसका एक हिस्सा स्वीकार करने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान आरोपी के आवास से ₹10 लाख की बेहिसाबी नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है।
सीबीआई के अनुसार, मामले की शुरुआत 3 जुलाई को दर्ज शिकायत से हुई। शिकायत एक ठेकेदार फर्म में कार्यरत सुपरवाइजर ने दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आरोपी अधिकारी ने ₹93 हजार की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने पहले चरण में आरोपी को ₹40 हजार दे दिए थे। इसके बाद उसे शेष ₹53 हजार लेकर 4 जुलाई को आने के लिए कहा गया। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले का सत्यापन किया और योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया।
जांच एजेंसी ने 4 जुलाई को जाल बिछाकर आरोपी को कथित रूप से शेष रिश्वत स्वीकार करते समय रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी के मनाली स्थित एमईएस परिसर के आवास पर तलाशी अभियान भी चलाया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को पहले से प्राप्त ₹40 हजार की राशि के अलावा लगभग ₹10 लाख नकद मिले, जिनके संबंध में तत्काल कोई संतोषजनक दस्तावेज या वैध स्रोत प्रस्तुत नहीं किया जा सका। एजेंसी अब इस नकदी के स्रोत और उससे जुड़े संभावित वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
सीबीआई ने बताया कि मामले में तलाशी और दस्तावेजों की जांच अभी जारी है। बरामद रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि मामला केवल एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित है या इसके पीछे किसी बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की भी भूमिका है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी को 5 जुलाई को सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अदालत से रिमांड मिलने की स्थिति में आरोपी से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
भ्रष्टाचार निरोधक मामलों के जानकारों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं और निर्माण कार्यों में भुगतान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। रिश्वतखोरी के आरोप न केवल सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति पर भी प्रतिकूल असर डालते हैं।
फिलहाल सीबीआई पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी।
