उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में जैत थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में डेटिंग ऐप के माध्यम से युवकों को निशाना बनाकर लूटपाट, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी और ब्लैकमेल करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, आरोपी समलैंगिकों के लिए लोकप्रिय डेटिंग ऐप Grindr पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवकों से संपर्क करते थे और विश्वास हासिल करने के बाद उन्हें मिलने के बहाने सुनसान स्थानों पर बुलाकर वारदात को अंजाम देते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका सुनियोजित था। आरोपी पहले डेटिंग ऐप के जरिए पीड़ितों से दोस्ती करते थे और बातचीत के दौरान उनका विश्वास जीतते थे। इसके बाद मुलाकात तय कर उन्हें ऐसे स्थानों पर बुलाया जाता था जहां आसपास लोगों की मौजूदगी कम हो। वहां पहुंचने पर पीड़ितों के साथ कथित रूप से मारपीट की जाती थी और उनके मोबाइल फोन, नकदी तथा अन्य कीमती सामान लूट लिए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी केवल लूटपाट तक सीमित नहीं रहते थे। पुलिस का आरोप है कि वे पीड़ितों से उनके मोबाइल फोन का पासवर्ड भी हासिल कर लेते थे और मोबाइल बैंकिंग या डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन का उपयोग कर उनके बैंक खातों से धनराशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इससे पीड़ितों को दोहरी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह पीड़ितों के अश्लील वीडियो भी कथित रूप से बना लेता था और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता था। बदनामी और सामाजिक कलंक के डर से अनेक पीड़ित पुलिस तक पहुंचने से बचते रहे, जिसके कारण गिरोह लंबे समय तक सक्रिय रहने में सफल रहा। जांच एजेंसियों का मानना है कि अब तक सामने आए मामलों से अधिक पीड़ित भी हो सकते हैं।
थानाध्यक्ष के नेतृत्व में जैत पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक सटीक सूचना मिलने के बाद शुक्रवार सुबह धौरैरा के जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर कार्रवाई की। पुलिस ने मौके से गिरोह के सभी सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनील (भोजपुर, बिहार), सूरज (रेवाड़ी, हरियाणा), रवि (वृंदावन), कृष्णा उर्फ बिट्टू (वृंदावन), भूपेंद्र (राया), प्रवीण (हाथरस) और राजेश सिंह (दमोह, मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी वर्तमान में वृंदावन क्षेत्र में रह रहे थे और वहीं से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूट के 10 मोबाइल फोन, ₹51,500 नकद तथा दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि संभावित अन्य पीड़ितों, बैंक लेनदेन और गिरोह के नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।
जैत थाने में आरोपियों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था, किन-किन जिलों या राज्यों में ऐसी वारदातों को अंजाम दे चुका है और क्या इसके तार किसी बड़े संगठित साइबर या आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं। आरोपियों के पूर्व आपराधिक इतिहास और उनके डिजिटल संचार की भी जांच की जा रही है।
Future Crime Research Foundation के विशेषज्ञों ने कहा कि डेटिंग ऐप आधारित अपराध तेजी से विकसित हो रहे साइबर-सक्षम अपराधों की श्रेणी में आते हैं, जिनमें अपराधी फर्जी पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और ब्लैकमेल का इस्तेमाल कर पीड़ितों को निशाना बनाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि किसी भी ऑनलाइन परिचित से पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक स्थान पर करें, अपनी लोकेशन, निजी तस्वीरें, बैंकिंग जानकारी या मोबाइल का पासवर्ड साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति धमकी देकर धन की मांग करे या निजी सामग्री वायरल करने की बात कहे, तो बिना घबराए तत्काल पुलिस और साइबर प्राधिकरण को सूचना दें।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस स्तर पर सभी आरोप जांच के अधीन हैं और उनकी अंतिम पुष्टि विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
