उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कौशाम्बी थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के दो और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अब तक 200 से अधिक लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूल चुका है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 64 पासपोर्ट, ₹1.86 लाख नकद, एक लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मांगेराम उर्फ अनुज कुमार और रणवीर के रूप में हुई है। दोनों सहारनपुर जिले के देवबंद क्षेत्र के निवासी हैं। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि दोनों कथित रूप से उस नेटवर्क का हिस्सा थे, जो विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये वसूलता था।
मामले की शुरुआत 21 मार्च को हुई, जब कौशाम्बी निवासी आकाश वालिया ने कौशाम्बी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, वैशाली सेक्टर-4 स्थित महालक्ष्मी टावर में संचालित ‘अल-नूर ट्रैवल’ नामक कार्यालय के संचालक उस्मान खान ने विदेश में नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर उनसे लगभग ₹1.80 लाख की राशि ले ली। बाद में कथित रूप से न तो नौकरी उपलब्ध कराई गई और न ही धनराशि वापस की गई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में पुलिस को आरोप मिला कि गिरोह पीड़ितों से मोटी रकम लेने के बाद उन्हें कथित रूप से फर्जी वीजा, फर्जी हवाई टिकट और नकली नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा देता था। जब पीड़ित विदेश जाने के लिए हवाई अड्डे पहुंचते थे, तब उन्हें दस्तावेजों के फर्जी होने का पता चलता था। पुलिस का आरोप है कि कुछ समय तक गतिविधियां संचालित करने के बाद आरोपी अपना कार्यालय बंद कर देते थे और नया ठिकाना बनाकर फिर से लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देते थे।
इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पहले उस्मान खान और सैफ इस्लाम उर्फ अब्दुल्ला अंसारी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी सामने आई। इसी आधार पर पुलिस ने फरार चल रहे मांगेराम उर्फ अनुज कुमार और रणवीर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 64 पासपोर्ट, ₹1.86 लाख नकद, एक लैपटॉप, कंप्यूटर तथा अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक एवं तकनीकी जांच कराई जा रही है ताकि संभावित पीड़ितों, वित्तीय लेनदेन और गिरोह के संचालन के तरीके का पूरा पता लगाया जा सके। बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
Future Crime Research Foundation के विशेषज्ञों ने कहा कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर आकर्षक वेतन, त्वरित वीजा और सुनिश्चित नियुक्ति का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि किसी भी एजेंसी को धनराशि देने से पहले उसकी वैधता, सरकारी पंजीकरण, लाइसेंस और विदेश स्थित नियोक्ता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। वीजा, नियुक्ति पत्र और टिकट की भी आधिकारिक माध्यमों से जांच कर लेनी चाहिए।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले से जुड़े सभी आरोप जांच के अधीन हैं और उनकी अंतिम पुष्टि विस्तृत विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
