रिलायंस एडीए समूह से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) अमित बापना को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, बापना पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद थे। विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट प्राप्त करने के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए चार दिन की CBI रिमांड मंजूर की है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अमित बापना अगस्त 2014 से दिसंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी रहे और कंपनी के वित्तीय निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाते थे। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर CBI का दावा है कि उन्होंने कथित तौर पर ऐसी मध्यस्थ और कंड्यूट कंपनियों को ऋण स्वीकृत करने में भूमिका निभाई, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिए गए ऋणों की स्वीकृति शर्तों के विपरीत थे।
CBI के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) द्वारा उधार ली गई धनराशि को कथित तौर पर इन मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए समूह की विभिन्न कंपनियों, जिनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड शामिल हैं, तक पहुंचाया गया। एजेंसी का आरोप है कि इससे ऋण देने वाले बैंकों को गलत तरीके से वित्तीय नुकसान पहुंचा, जबकि आरोपियों और संबंधित संस्थाओं को अनुचित लाभ मिला।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अमित बापना को विशेष अदालत के समक्ष पेश कर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। अदालत ने पूछताछ के लिए चार दिनों की हिरासत मंजूर करते हुए जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
CBI अब तक रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) से जुड़े मामलों में सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की शिकायतों के आधार पर सात प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। इन मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है।
एजेंसी इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में 29 मई को पहली आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिसमें कंपनी, उसके पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और 10 बैंक अधिकारियों सहित कुल 16 आरोपियों को नामजद किया गया था।
अमित बापना की गिरफ्तारी के साथ ही रिलायंस एडीए समूह से जुड़े मामलों में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या छह हो गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया तथा धन के कथित डायवर्जन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है।
Future Crime Research Foundation का कहना है कि कॉरपोरेट बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में धन के प्रवाह, संबंधित कंपनियों के बीच लेनदेन और ऋण स्वीकृति प्रक्रिया का फॉरेंसिक वित्तीय विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड, कॉरपोरेट दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रेल की गहन जांच से कथित वित्तीय अनियमितताओं का पूरा नेटवर्क सामने लाने में सहायता मिलती है।
