उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित आवास विकास परिषद में तैनात सहकारी अधिकारी (आवास) सतीश कुमार के कथित रूप से रिश्वत लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। मामले में सहायक आवास आयुक्त एवं सहायक निबंधक की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अधिकारी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से संपादित किया गया है और उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, यूट्यूब और व्हाट्सएप पर लगभग 5 मिनट 32 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें सहकारी अधिकारी कथित तौर पर नकदी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने उसका संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 से वेब सिटी स्थित संचार नेस्ट समिति में लगभग ₹100 करोड़ के कथित वित्तीय घोटाले की जांच संबंधित अधिकारी के स्तर पर चल रही थी। वायरल वीडियो को इसी जांच से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर धन की मांग की गई और वीडियो में नोटों की गड्डी लेते हुए बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है।
वीडियो में कथित रूप से यह भी सुनाई देता है कि समिति को सील कराने, दस्तावेज न मिलने पर कार्रवाई करने तथा ₹5 लाख खर्च कर बोर्ड भंग कराने जैसी बातें कही जा रही हैं। बातचीत में नए चुनाव और मल्टी-स्टोरी परियोजना को लेकर भी कथित चर्चा होने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह वीडियो 25 जून को एक समाचार चैनल पर भी प्रसारित हुआ था। इसके बाद मुख्यालय से प्राप्त संस्तुति के आधार पर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों, वीडियो की मूल फाइल, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाएगा। जांच के तहत आरोपी अधिकारी को नोटिस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
दूसरी ओर, सहकारी अधिकारी सतीश कुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने वीडियो वायरल किया है, उसके खिलाफ पहले से करोड़ों रुपये के कथित गबन की जांच चल रही है। उनके अनुसार, जांच को प्रभावित करने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से वीडियो को एआई तकनीक की सहायता से संपादित कर प्रसारित किया गया है। उन्होंने आरोपों को साजिश का हिस्सा बताया है।
मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई गई घटनाओं और सभी संबंधित परिस्थितियों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
