अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों को भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास अधिकारी बनकर फर्जी कॉल के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

आवास विकास के फर्जी अधिकारी बनकर 12 लोगों से ₹3.56 करोड़ की कथित ठगी, लखनऊ में एफआईआर दर्ज

Team The420
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आवास विकास परिषद के अधिकारी बनकर 12 लोगों से करीब ₹3.56 करोड़ की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने वृंदावन योजना में वर्ष 2008 की दरों पर मकान आवंटित कराने का झांसा देकर पीड़ितों से करोड़ों रुपये वसूले और उन्हें कथित फर्जी आवंटन पत्र सौंप दिए। रजिस्ट्री में लगातार देरी होने पर पीड़ितों ने आवास विकास परिषद से जानकारी ली, जहां कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर आशियाना थाने में नौ आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

शिकायत के अनुसार, सितंबर 2022 में शारदानगर के रुचिखंड-1 निवासी भुवनेश अग्रवाल की मुलाकात अफजल और शानू अली ने राजेंद्र प्रसाद से कराई, जिसने स्वयं को आवास विकास परिषद मुख्यालय में कार्यालय अधीक्षक बताया। आरोप है कि उसने वर्ष 2008 की दरों पर निरस्त मकानों का दोबारा आवंटन कराने का दावा किया और पूरी प्रक्रिया को गोपनीय बताते हुए भरोसा दिलाया।

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इसके बाद भुवनेश अग्रवाल और उनकी पत्नी पुष्पलता अग्रवाल, जो गांधी स्मारक चिकित्सालय से सहायक अधीक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, कथित रूप से मकान खरीदने के लिए तैयार हो गए। बाद में उनकी मुलाकात लक्ष्मण प्रसाद और यशवंत सिंह से कराई गई। आरोप है कि इन लोगों ने पुष्पलता, ध्रुव अग्रवाल और दीपशिखा अग्रवाल के नाम पर आवेदन पत्र भरवाए तथा नकद और बैंक खातों के माध्यम से लगभग ₹15 लाख जमा करा लिए।

जांच के अनुसार, भुवनेश अग्रवाल ने आरोपियों पर भरोसा कर अपने मित्रों और रिश्तेदारों से भी उनकी मुलाकात कराई। आरोप है कि सभी से आवेदन पत्र भरवाकर बड़ी रकम ली गई और कथित फर्जी आवंटन पत्र सौंप दिए गए। जब रजिस्ट्री की प्रक्रिया बार-बार टलने लगी तो पीड़ितों ने सीधे आवास विकास परिषद से संपर्क किया, जहां पता चला कि दस्तावेज कथित रूप से फर्जी हैं और संबंधित व्यक्ति परिषद के अधिकृत अधिकारी नहीं थे।

शिकायत में बताया गया है कि दीपक कुमार से लगभग ₹87.91 लाख, मोहन अग्रवाल से ₹62.40 लाख, पुष्पलता अग्रवाल से ₹51.32 लाख, संजय दीक्षित से ₹31 लाख, पुनीत अग्रवाल से ₹27.44 लाख, रणवीर प्रसाद दुबे से ₹27 लाख, शक्ति सिंह से ₹25.65 लाख, सुजाता देवी से ₹17.91 लाख, रश्मि माथुर से ₹12.79 लाख, ध्रुव अग्रवाल से ₹8 लाख, भुवनेश अग्रवाल से ₹5.45 लाख तथा दीपशिखा अग्रवाल से ₹1.03 लाख की कथित ठगी की गई।

पुलिस आयुक्त के निर्देश पर आशियाना थाने में अफजल, शानू, राजेंद्र प्रसाद, रुकमणी राय उर्फ रिंकी, कृपाशंकर, यशवंत सिंह, रमेश, लक्ष्मण और देश दीपक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।

किरायेदार पर महिला के खाते से ₹6.26 लाख निकालने का आरोप

इसी बीच लखनऊ के तेलीबाग स्थित पिपरीखेड़ा सेक्टर-19 क्षेत्र में एक अन्य कथित धोखाधड़ी का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि एक किरायेदार ने अपनी मकान मालकिन के बैंक खाते से ₹6.26 लाख निकाल लिए।

शिकायतकर्ता अनीता ने बताया कि वर्ष 2017 में उनके पति की मृत्यु के बाद उन्होंने पैतृक संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि अपने बैंक खाते में जमा कराई थी। आरोप है कि किरायेदार ने बैंक संबंधी कार्य में सहायता करने के बहाने उनका यूपीआई (UPI) सक्रिय कराया और बाद में धीरे-धीरे खाते से रकम निकाल ली।

मामले का खुलासा तब हुआ जब अनीता मई में बैंक पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने आईजीआरएस (IGRS), पीजीआई थाने और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, बाद में अनीता और उनके बेटों ने वृंदावन क्षेत्र में किरायेदार के एक कथित सहयोगी को पहचानकर पुलिस के हवाले कर दिया। उससे पूछताछ की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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