भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नवीनतम वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report) में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साइबर हमलों को वित्तीय क्षेत्र के लिए उभरता हुआ प्रमुख जोखिम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले एक वर्ष में एआई-संचालित साइबर अटैक का खतरा सबसे अधिक रहने की आशंका है। केंद्रीय बैंक ने आगाह किया है कि तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक साइबर हमलों को अधिक जटिल और प्रभावशाली बना रही है, जबकि कई बैंक अभी भी इस चुनौती से पूरी तरह निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई आधारित साइबर हमलों के कारण बैंकिंग सेवाएं बाधित हो सकती हैं, संवेदनशील डेटा की हानि हो सकती है और भुगतान प्रणालियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे हमलों का प्रभाव केवल व्यक्तिगत संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र की स्थिरता पर भी असर डाल सकता है।
आरबीआई के अनुसार, एआई तकनीक में हो रही तीव्र प्रगति साइबर अपराधियों को अधिक परिष्कृत तरीके अपनाने में सक्षम बना रही है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि एआई सिस्टम बैंकिंग नेटवर्क की कमजोरियों की पहचान कर सकते हैं, अत्यंत विश्वसनीय दिखने वाले लेकिन धोखाधड़ी वाले संदेश तैयार कर सकते हैं और पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपायों को चुनौती दे सकते हैं। इससे मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं।
रिपोर्ट में वैश्विक साइबर हमलों की प्रवृत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, रूस में साइबर हमलों की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की गई हैं। इसके बाद यूक्रेन और भारत का स्थान है। तुर्की, मैक्सिको और चीन भी उन देशों में शामिल हैं जहां साइबर हमलों की घटनाएं उल्लेखनीय स्तर पर दर्ज की गई हैं।
बैंकों की तैयारियों का आकलन करने के लिए आरबीआई ने एक सर्वेक्षण भी कराया। सर्वे में अधिकांश बैंकों ने अपनी साइबर सुरक्षा तैयारियों को सामान्य स्तर का बताया, जबकि कुछ संस्थानों ने स्वयं को बेहतर तरीके से तैयार बताया। सर्वेक्षण के अनुसार, 98 प्रतिशत बैंकों ने वर्तमान साइबर जोखिम स्तर को ‘बहुत निम्न’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा। इसके बावजूद अधिकांश संस्थानों का मानना था कि उनके साइबर जोखिम नियंत्रित और प्रबंधनीय हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 81 प्रतिशत बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने कुल राजस्व का 5 प्रतिशत से कम हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पर व्यय किया। यह संकेत देता है कि अनेक बैंक अभी भी सीमित आईटी निवेश के साथ बढ़ते साइबर जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता ने कहा कि एआई आधारित साइबर हमले पारंपरिक हमलों की तुलना में अधिक तेज, स्वचालित और लक्षित हो सकते हैं। उनके अनुसार, वित्तीय संस्थानों को एआई-संचालित सुरक्षा प्रणालियां अपनाने, नियमित थ्रेट इंटेलिजेंस, रेड-टीम परीक्षण, कर्मचारी जागरूकता प्रशिक्षण और निरंतर सुरक्षा निगरानी को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि उभरते साइबर खतरों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
