उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक रियल एस्टेट कंपनी के रेरा (RERA) पंजीकृत बैंक खाते से ₹1.31 करोड़ के कथित गबन का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने कंपनी के अकाउंटेंट रॉबिन सिंह समेत 33 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि गबन की गई रकम कई लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
शिकायतकर्ता अनमोल कुमार, जो बिहानी कंस्ट्रक्शन में प्रशासनिक अधिकारी हैं, ने आरोप लगाया कि रॉबिन सिंह लंबे समय से कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत था और रेरा में पंजीकृत बैंक खाते से होने वाले वित्तीय लेनदेन तथा लेखा-जोखा की जिम्मेदारी संभालता था। कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की न्यू टाउनशिप नीति के तहत लाइसेंस प्राप्त है और परियोजना से जुड़े आवंटियों द्वारा जमा की गई राशि रेरा के अधिकृत खाते में जमा की जाती थी। किसी आवंटन के निरस्त होने की स्थिति में धनवापसी भी इसी खाते से की जाती थी।
शिकायत के अनुसार, अगस्त 2025 में रॉबिन सिंह ने कथित तौर पर कंपनी प्रबंधन का विश्वास जीतकर कुछ ब्लैंक चेक अपने पास ले लिए। इसके बाद फर्जी आवंटियों के नाम पर कथित रूप से जाली दस्तावेज तैयार किए गए और यह दर्शाया गया कि भूमि आवंटन रद्द हो गया है। इसी आधार पर जून 2026 तक कई चरणों में रेरा खाते से ₹1.31 करोड़ निकालकर विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
कंपनी का आरोप है कि धनराशि आरोपी के परिजनों, रिश्तेदारों, परिचितों और अन्य लोगों के खातों में भेजी गई। कथित अनियमितता का पता चलने के बाद रॉबिन सिंह फरार हो गया। इसके बाद कंपनी ने बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट की समीक्षा में कई बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई। इसी आधार पर पुलिस ने शिकायत में नामजद कुल 33 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि प्रत्येक बैंक लेनदेन, दस्तावेज और संबंधित खातों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लोगों की क्या भूमिका रही और किसे कथित गबन की राशि का लाभ मिला।
प्रारंभिक जांच में पुलिस वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले पर प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि वित्तीय गबन के मामलों में केवल धनराशि का ट्रांसफर ही पर्याप्त साक्ष्य नहीं होता, बल्कि पूरे मनी ट्रेल का वैज्ञानिक विश्लेषण आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड, लाभार्थी खातों, दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि धनराशि का वास्तविक उपयोग किसने किया और किसकी भूमिका आपराधिक साजिश में थी। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में समयबद्ध डिजिटल जांच और बैंकिंग डेटा का विश्लेषण आरोपियों तक पहुंचने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
