राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियां चोरी की घटना के साथ-साथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी सुरक्षाकर्मी के खिलाफ कोई आधिकारिक आरोप तय नहीं किया गया है और जांच जारी है।
जांच एजेंसियां सुरक्षाकर्मियों के ड्यूटी रोस्टर, तैनाती के स्थान, प्रवेश एवं निकास रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। प्रारंभिक जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे के आवागमन के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं तथा कहीं किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर परिसर के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों, दर्शन पथ तथा चढ़ावा ले जाने वाले रास्तों पर निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती रहती थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी व्यक्ति को बिना आवश्यक जांच के प्रवेश या आवागमन की अनुमति दी गई थी। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका या लापरवाही के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसके अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में जांच का दायरा मंदिर की निगरानी व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) उन परिस्थितियों की समीक्षा कर रहे हैं जिनके बीच मंदिर परिसर में स्थापित लगभग 1,600 सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बावजूद कथित चोरी की घटना सामने आई। जांच के तहत निगरानी प्रणाली के संचालन, रिकॉर्डिंग व्यवस्था और संबंधित प्रक्रियाओं का भी परीक्षण किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां केवल घटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों की भी विस्तृत जांच कर रही हैं। पुलिस ने आरोपियों से पिछले तीन वर्षों में अर्जित चल और अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, आभूषणों और अन्य मूल्यवान परिसंपत्तियों का पूरा विवरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि उनकी घोषित आय और अर्जित संपत्तियों के बीच कोई असामान्य अंतर तो नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम आरोपियों की आय और खर्च का मिलान कर रही है। बैंक खातों, संपत्ति संबंधी दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रूप से गबन की गई धनराशि का उपयोग किन माध्यमों से किया गया। साथ ही आरोपियों के परिजनों और करीबी रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
जांच के दौरान विशेष रूप से लवकूश, अनुकल्प और टिन्नू यादव की संपत्तियां जांच के केंद्र में हैं। सूत्रों के अनुसार, लवकूश की पत्नी के नाम पर खरीदी गई जमीन और उस पर बने तीन मंजिला मकान के निवेश की जांच की जा रही है। अनुकल्प की चल और अचल संपत्तियों का भी सत्यापन किया जा रहा है, जबकि टिन्नू यादव के बैंक खातों की जांच के साथ उसके कब्जे से बरामद आभूषणों की भी पड़ताल की जा रही है। इन सभी पहलुओं की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस मामले पर प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि किसी भी बड़े वित्तीय गबन या संगठित अपराध की जांच में केवल मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि मनी ट्रेल, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, सीसीटीवी साक्ष्य और संपत्तियों का फॉरेंसिक विश्लेषण यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि कथित अवैध धन का उपयोग कहां और किस रूप में किया गया। उनके अनुसार, वित्तीय जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का समन्वित विश्लेषण ही ऐसे मामलों में पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का सबसे प्रभावी माध्यम होता है।
