NEET-UG पेपर लीक मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने CBI को आरोपी के अतिरिक्त हस्तलेखन और हस्ताक्षर नमूने लेने की अनुमति दी है।

सात राज्यों तक फैला NEET सॉल्वर गैंग का नेटवर्क, मेडिकल छात्रों के जरिए परीक्षा में प्रतिरूपण का आरोप

Team The420
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राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में मूल परीक्षार्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाकर परीक्षा दिलाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सॉल्वर गिरोह का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का विस्तार सात राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें विभिन्न प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के मेधावी छात्रों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिहार के तीन मेडिकल संस्थानों से जुड़े पांच छात्रों ने इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया और लाखों रुपये लेकर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह मेडिकल छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर बैठाने की व्यवस्था की।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह पिछले लगभग चार वर्षों से सक्रिय था और इस दौरान करीब 300 अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाए जाने की आशंका है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है तो इस अवैध नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए लखीसराय पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क, उसके वित्तीय लेनदेन और विभिन्न राज्यों में फैले संपर्कों की जांच कर रही हैं।

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जांच के अनुसार, गिरोह का मुख्य संचालन पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH), बीएमआईएमएस पावापुरी तथा एएनएमसीएच गया से जुड़े पांच छात्रों द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि इन लोगों ने विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों से संपर्क स्थापित किया और उन्हें सॉल्वर के रूप में अपने नेटवर्क से जोड़ा। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों से भारी रकम लेकर उनकी जगह इन छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर भेजा जाता था।

प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां बीएसयू मेडिकल कॉलेज, एम्स रायबरेली, शाहदरा स्थित एक विश्वविद्यालय के मेडिकल संस्थान, ओडिशा के गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, मध्य प्रदेश के सतना स्थित मेडिकल कॉलेज सहित अन्य संस्थानों से जुड़े छात्रों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलता था और फर्जी पहचान तथा प्रतिरूपण के जरिए परीक्षा दिलाने की पूरी व्यवस्था करता था। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल डेटा, बैंक खातों, डिजिटल वित्तीय लेनदेन और संचार रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े थे तथा अवैध रूप से अर्जित धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ।

इस बीच, NEET-UG पेपर लीक मामले में भी कानूनी कार्रवाई जारी है। नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ा दी है। सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने जांच जारी रहने के मद्देनजर उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संगठित प्रतिरूपण गिरोह केवल प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली ही नहीं बल्कि चिकित्सा शिक्षा की विश्वसनीयता के लिए भी गंभीर चुनौती हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था, इसमें और कितने लोग शामिल थे तथा क्या इसी तरह की कार्यप्रणाली का इस्तेमाल अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी किया गया। मामले की जांच डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर लगातार आगे बढ़ रही है।

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