उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में गो-तस्करी से जुड़े कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच के दौरान पुलिस ने बिहार के रोहतास जिले से ₹25,000 के इनामी आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने अपने बैंक खाते के माध्यम से कथित गो-तस्करों और उनके परिजनों के खातों में कुल ₹4.77 करोड़ का लेनदेन किया, जिसमें से लगभग ₹2.5 करोड़ 31 कथित गो-तस्करों के खातों में अक्टूबर 2025 से अब तक स्थानांतरित किए गए।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई वर्ष 2025 में गो-तस्करी के मामलों में हुई गिरफ्तारियों के बाद शुरू हुई विस्तृत जांच का हिस्सा है। विवेचना के दौरान एक संगठित नेटवर्क का पता चला, जिसमें 31 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। जांच में इस नेटवर्क से जुड़े लगभग ₹187 करोड़ के वित्तीय लेनदेन का भी खुलासा होने का दावा किया गया, जिसके बाद धन के प्रवाह और बैंक खातों की गहन जांच शुरू की गई।
इसी जांच के दौरान बिहार के रोहतास जिले के चेनारी थाना क्षेत्र निवासी अखिलेश कुमार का नाम सामने आया। पुलिस का आरोप है कि वह अपने बैंक खाते के जरिए कथित गो-तस्करों और उनसे जुड़े लोगों को धनराशि भेजता था। बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच में उसके खाते से कुल ₹4.77 करोड़ विभिन्न खातों में स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद उसके खिलाफ 9 अक्टूबर 2025 को सैयदराजा थाने में मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी न होने पर उसके खिलाफ ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया और उसकी तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई।
पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर रविवार देर रात रोहतास जिले में स्थित उसकी मोबाइल एवं हार्डवेयर की दुकान से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियां अब उसके बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं ताकि धन के स्रोत, लाभार्थियों और पूरे नेटवर्क की भूमिका का पता लगाया जा सके।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के नाम पर एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालित होने की जानकारी मिली थी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ऐसा कोई सक्रिय CSC केंद्र संचालित नहीं पाया गया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने मोहम्मद अफजल, शेख सुल्तान, सोनू कुरैशी, पवन कुमार, अफजल सहित 31 कथित गो-तस्करों के खातों में लगभग ₹2.5 करोड़ भेजे। इसके अतिरिक्त उसने अपने कुछ परिजनों और रिश्तेदारों के खातों में भी धनराशि स्थानांतरित करने की बात स्वीकार की है। पुलिस इन दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित लेनदेन केवल धन के हस्तांतरण तक सीमित था या आरोपी पूरे वित्तीय नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था। बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मनी ट्रेल से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान और नेटवर्क के विस्तार की भी जांच जारी है।
