राजस्थान के युवक को शादी का झांसा देकर गोरखपुर बुलाया गया, फर्जी विवाह की रस्में कराईं, फिर नकली पुलिस बनकर बंधक बनाया गया और लाखों रुपये की उगाही की गई। मामले में आठ आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नकदी और फर्जी पुलिस पहचान पत्र भी बरामद किए हैं।
गोरखपुर में शादी के नाम पर युवकों को जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में हिस्ट्रीशीटर अंकुर सिंह समेत आठ आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से दूसरे राज्यों के युवकों को शादी का झांसा देकर गोरखपुर बुलाता था और फिर नकली पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे बड़ी रकम वसूलता था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब राजस्थान के कोटा निवासी मुकेश मीणा अपने भाई के विवाह के लिए रिश्ता तलाश रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात हरियाणा के फरीदाबाद निवासी राजू शर्मा से हुई। राजू शर्मा ने उन्हें गोरखपुर की तीन युवतियों की तस्वीरें भेजीं, जिनमें से एक युवती को पसंद करने के बाद शादी तय कर दी गई।
तय योजना के अनुसार मुकेश मीणा अपने परिजनों के साथ गोरखपुर पहुंचे। यहां हिस्ट्रीशीटर अंकुर सिंह के घर पर शादी का पूरा माहौल तैयार किया गया। कथित मौसी शैला देवी एक युवती को लेकर पहुंची और जयमाल सहित विवाह की रस्में भी पूरी कराई गईं, जिससे पीड़ित परिवार को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
लेकिन रस्में पूरी होते ही पूरा घटनाक्रम बदल गया। आरोप है कि अंकुर सिंह ने खुद को पुलिस का दरोगा बताकर परिचय दिया, जबकि उसके दो साथियों ने सिपाही और होमगार्ड की भूमिका निभाई। गिरोह के सदस्यों ने फर्जी पुलिस पहचान पत्र दिखाकर परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। भय का माहौल बनाकर पीड़ित परिवार को बंधक बना लिया गया और उनसे बड़ी रकम की मांग की गई।
डरे-सहमे मुकेश मीणा ने अपनी पत्नी को फोन कर रुपये मंगवाए। जैसे ही गिरोह के सदस्यों को रकम मिली, सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। बाद में पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और जांच आगे बढ़ी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कथित मौसी शैला देवी को इस साजिश में शामिल होने के लिए ₹20,000 दिए गए थे, जबकि शादी का नाटक करने वाली युवती को ₹15,000 का भुगतान किया गया था।
शिकायत मिलने के बाद पहले जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे बाद में गोरखपुर के चिलुआताल थाने में स्थानांतरित कर दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह की गतिविधियों का खुलासा करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की।
इस मामले में नामजद किए गए आरोपियों में हिस्ट्रीशीटर अंकुर सिंह, फरीदाबाद निवासी राजू शर्मा, धीरेंद्र यादव उर्फ टुनटुन, रवि चौधरी, मुन्ना जायसवाल, नवमी शर्मा, शैला देवी और नीलम सिंह शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है और गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की भी तलाश जारी है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से ₹1.66 लाख नकद और दो फर्जी पुलिस पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और अन्य राज्यों तक फैले संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से शादी के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा था और सुनियोजित तरीके से फर्जी विवाह, नकली पुलिस कार्रवाई तथा धमकी का सहारा लेकर ठगी की वारदातों को अंजाम देता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए हैं।
