एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदनीपुर जिले के हल्दिया निवासी संजीव कुमार वर्मा ने लखनऊ के सरोजनीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए ट्रांसपोर्टनगर स्थित स्काई हाई एजुकेशन कार्यालय से जुड़े विनय मौर्य, संजय और रिसेप्शनिस्ट प्राची पर ₹5 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने संजीव कुमार वर्मा को भरोसा दिलाया कि उनकी बेटी रितिषा वर्मा का मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश कराया जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर रिसेप्शनिस्ट प्राची ने रितिषा को लखनऊ स्थित कार्यालय बुलाया।
पीड़ित का आरोप है कि कार्यालय पहुंचने पर संजय और विनय मौर्य ने पंजीकरण और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर अग्रिम राशि जमा करने को कहा। उनके भरोसे में आकर संजीव कुमार वर्मा ने विनय मौर्य के बैंक खाते में ₹5 लाख जमा कर दिए।
एफआईआर के अनुसार, रकम मिलने के बाद आरोपियों ने दावा किया कि पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है। लगातार और पैसे मांगे जाने पर संजीव कुमार वर्मा को संदेह हुआ। जब उन्होंने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो कथित फर्जीवाड़े का पता चला।
शिकायत में कहा गया है कि सच्चाई सामने आने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए और उनसे संपर्क टूट गया। इसके बाद पीड़ित ने सरोजनीनगर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर ने कहा कि शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में जालसाज अभिभावकों की जल्द प्रवेश दिलाने की चिंता का फायदा उठाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी कंसल्टेंसी या एजेंट को बड़ी रकम देने से पहले उसकी वैधता, संस्थान की आधिकारिक मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य करें।
