हरियाणा के नूंह में पकड़े गए नकली उर्वरक रैकेट की जांच में हापुड़ कनेक्शन सामने आने के बाद कृषि विभाग सतर्क हो गया है। जांच में सामने आया है कि हापुड़ से कथित तौर पर नकली डीएपी और पोटाश तैयार कर कई राज्यों में सप्लाई की जा रही थी।
हापुड़ में लगातार कार्रवाई के बावजूद नकली डीएपी और अन्य उर्वरकों के अवैध कारोबार का नेटवर्क सक्रिय होने के आरोप सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यहां तैयार किया जा रहा कथित नकली उर्वरक उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा अन्य राज्यों तक भी पहुंच रहा था, जिससे इस अवैध कारोबार के व्यापक नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है।
हाल ही में हरियाणा के नूंह जिले में पुलिस द्वारा नकली उर्वरक रैकेट का भंडाफोड़ किए जाने के बाद जांच में इसके तार हापुड़ से जुड़े होने की बात सामने आई। जांच एजेंसियों के अनुसार, हरियाणा में बरामद नकली उर्वरक की आपूर्ति कथित रूप से हापुड़ से की जा रही थी। इस खुलासे के बाद जिले में उर्वरक कारोबार की निगरानी और सख्त कर दी गई है।
जांच के अनुसार, आरोपी अनुदानित डीएपी और यूरिया के खाली कट्टों में नकली उर्वरक भरकर उन्हें असली उत्पाद के रूप में किसानों को बेच रहे थे। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी सब्सिडी वाले उर्वरकों के पैकेजिंग बैग का इस्तेमाल कर किसानों का विश्वास जीतने की कोशिश की जा रही थी।
इससे पहले 24 अक्टूबर 2025 को जिला कृषि विभाग ने मोदीनगर रोड स्थित सीएमओ कार्यालय के सामने चल रही तीन अवैध फैक्ट्रियों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान करीब 3,000 कट्टे नकली डीएपी और पोटाश बरामद किए गए थे तथा तीनों फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया था।
छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों से संकेत मिले थे कि कथित नकली उर्वरक राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने मौके से नकली कृषि न्यूट्रिशन उत्पाद भी बरामद किए थे।
जांच में यह भी सामने आया कि नकली डीएपी तैयार करने के लिए लाल गेरू, चीन निर्मित ह्यूमिक एसिड, मैग्नीशियम सल्फेट, सिंथेटिक आयरन और साधारण नमक जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, लगभग ₹50 की लागत में तैयार किए गए एक कट्टे को असली डीएपी बताकर करीब ₹1,800 में बेचा जा रहा था। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई छापेमारी अभियानों के दौरान लाखों खाली उर्वरक कट्टे बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से कई कट्टों पर सरकारी सब्सिडी वाले उर्वरकों से संबंधित प्रिंटिंग मिली, जिससे इनके दुरुपयोग की आशंका और मजबूत हुई।
अब तक इस मामले में पांच से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई के बावजूद नकली उर्वरक का अवैध कारोबार पूरी तरह नहीं रुक पाया है।
जिला कृषि अधिकारी गौरव प्रकाश ने कहा कि कालाबाजारी और नकली उर्वरकों के कारोबार पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। नूंह प्रकरण के बाद विशेष टीमें गठित कर निगरानी बढ़ा दी गई है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि हापुड़ से तैयार कथित नकली उर्वरक किन-किन राज्यों और जिलों तक पहुंचाया गया तथा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
