CERT-In ने WhatsApp Web और Desktop यूजर्स को हैक किए गए अकाउंट से भेजी जा रही मैलवेयर फाइलों से सतर्क रहने की सलाह दी है।

व्हाट्सएप डेस्कटॉप और वेब यूजर्स के लिए CERT-In का हाई अलर्ट, हैक अकाउंट से फैलाए जा रहे मैलवेयर से सतर्क रहने की सलाह

Team The420
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राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था CERT-In ने व्हाट्सएप के डेस्कटॉप और वेब संस्करण का उपयोग करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि साइबर अपराधी हैक किए गए व्हाट्सएप खातों के माध्यम से मैलवेयर संक्रमित फाइलें भेजकर उपयोगकर्ताओं के कंप्यूटर और अन्य उपकरणों तक अनधिकृत पहुंच हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। एजेंसी के अनुसार यह अभियान सोशल इंजीनियरिंग तकनीक पर आधारित है, जिसमें लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें साइबर हमले का शिकार बनाया जा रहा है।

एडवाइजरी के मुताबिक हमलावर सबसे पहले किसी व्यक्ति का व्हाट्सएप अकाउंट अपने नियंत्रण में लेते हैं। इसके बाद उसी खाते का इस्तेमाल करते हुए उसके संपर्कों में मौजूद दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अन्य परिचित लोगों को वायरस या मैलवेयर युक्त फाइलें भेजी जाती हैं। चूंकि संदेश किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नंबर से आता है, इसलिए अधिकांश लोग बिना किसी संदेह के फाइल डाउनलोड या ओपन कर देते हैं। यही विश्वास साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है और उपयोगकर्ता अनजाने में अपने डिवाइस को खतरे में डाल देते हैं।

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CERT-In ने आगाह किया है कि यदि संक्रमित फाइल सफलतापूर्वक खुल जाती है तो मैलवेयर डिवाइस में सक्रिय होकर साइबर अपराधियों को सिस्टम पर नियंत्रण स्थापित करने का अवसर दे सकता है। इसके बाद हमलावर संवेदनशील दस्तावेज, लॉगिन क्रेडेंशियल, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी चोरी कर सकते हैं। इतना ही नहीं, वे अतिरिक्त मैलवेयर या जासूसी सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे बैंकिंग धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, डेटा लीक और अन्य वित्तीय अपराधों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ संस्थानों और कारोबारी संगठनों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।

एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीकी कमजोरियों से अधिक सोशल इंजीनियरिंग रणनीतियों का सहारा ले रहे हैं। हैक किए गए भरोसेमंद व्हाट्सएप खातों से भेजी गई फाइलें वास्तविक प्रतीत होती हैं, जिससे उपयोगकर्ता बिना जांच-पड़ताल किए उन्हें खोल देते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अप्रत्याशित दस्तावेज, फोटो, पीडीएफ, जिप फाइल या अन्य अटैचमेंट को खोलने से पहले उसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से जांच लेना बेहद जरूरी है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज अधिकांश सफल साइबर हमलों की शुरुआत किसी तकनीकी खामी से नहीं, बल्कि मानवीय विश्वास के दुरुपयोग से होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिचित व्यक्ति के व्हाट्सएप नंबर से भी कोई असामान्य फाइल, लिंक या दस्तावेज प्राप्त हो तो उसे तुरंत खोलने के बजाय पहले फोन कॉल या किसी अन्य विश्वसनीय माध्यम से यह पुष्टि कर लेनी चाहिए कि संदेश वास्तव में उसी व्यक्ति ने भेजा है। उनके अनुसार कुछ सेकंड की सावधानी लाखों रुपये की साइबर ठगी, डेटा चोरी और डिजिटल पहचान से जुड़े अपराधों से बचा सकती है।

CERT-In ने उपयोगकर्ताओं को सलाह दी है कि वे किसी भी ऐसी फाइल को डाउनलोड या ओपन न करें जिसकी उन्हें पहले से अपेक्षा न हो। यदि कोई परिचित व्यक्ति भी कोई दस्तावेज भेजता है तो उसकी पुष्टि अवश्य करें। साथ ही यदि किसी संदेश की भाषा, शैली या व्यवहार असामान्य लगे अथवा सामने वाला व्यक्ति जल्दबाजी में फाइल खोलने का दबाव बनाए, तो उसे संभावित साइबर हमले का संकेत मानते हुए सतर्क रहें।

एजेंसी ने यह भी कहा कि नियमित रूप से सिस्टम और एप्लिकेशन अपडेट रखना, मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाना, संदिग्ध फाइलों से दूरी बनाए रखना और किसी भी डिजिटल दस्तावेज की पुष्टि करने जैसी सामान्य साइबर सुरक्षा आदतें अपनाकर ऐसे मैलवेयर अभियानों से होने वाले वित्तीय नुकसान, डेटा चोरी और अन्य साइबर जोखिमों को काफी हद तक रोका जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों के बीच जागरूकता, सतर्कता और समय पर सत्यापन ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।

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