तमिलनाडु के कोयंबटूर में कथित निवेश घोटाले का मामला सामने आया है, जहां एक निजी टेक्सटाइल कंपनी के दो निदेशकों पर निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने केरल के त्रिशूर निवासी पी. विनु वाल्सन और उनकी पत्नी ऋतु वाल्सन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों आरवी फैबटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक बताए गए हैं, जो कोयंबटूर के पप्पनायक्केनपालयम स्थित भरतियार रोड से संचालित होती थी।
शिकायतकर्ता कोयंबटूर के वेल्लालुर निवासी 61 वर्षीय के. पार्थिबन ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उन्हें निवेश पर असाधारण रिटर्न का झांसा दिया। उनके अनुसार, ₹1 लाख के निवेश पर हर महीने 18 प्रतिशत यानी ₹18,000 ब्याज देने का वादा किया गया था। यह राशि प्रत्येक सप्ताह ₹4,500 की किस्तों में देने तथा छह महीने बाद पूरी मूल धनराशि लौटाने का आश्वासन भी दिया गया था।
शिकायत के मुताबिक पार्थिबन ने जुलाई 2023 में ₹1 लाख का पहला निवेश किया था। इस दौरान कंपनी की ओर से एक औपचारिक निवेश समझौते पर हस्ताक्षर भी कराए गए। शुरुआती महीनों में उन्हें कुल ₹97,910 का भुगतान किया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने अक्टूबर 2023 में अतिरिक्त ₹2 लाख का निवेश कर दिया।
पीड़ित का कहना है कि दूसरे निवेश के बाद उन्हें लगभग ₹50,000 तक आंशिक भुगतान मिला, लेकिन दिसंबर 2023 के मध्य के बाद सभी भुगतान अचानक बंद हो गए। जब उन्होंने कंपनी से संपर्क करने का प्रयास किया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
बाद में पार्थिबन अपने परिवार के साथ कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। मौके पर कई अन्य निवेशक भी मौजूद थे, जिन्होंने दावा किया कि वे भी इसी तरह कथित ठगी का शिकार हुए हैं। आरोप है कि कंपनी के निदेशक कार्यालय बंद कर फरार हो गए।
आर्थिक अपराध शाखा ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी निवेश से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल एवं बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों ने ऐसे अन्य निवेशकों से भी आगे आने और शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, जो इसी योजना के तहत कथित रूप से ठगी का शिकार हुए हों।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर ने कहा कि निवेश संबंधी धोखाधड़ी में जालसाज अक्सर शुरुआती चरण में निवेशकों को समय पर भुगतान कर उनका विश्वास जीतते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद भुगतान बंद कर देते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले कंपनी की वैधता, नियामकीय पंजीकरण और प्रस्तावित रिटर्न की वास्तविकता की स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करें।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आजकल वित्तीय ठगी केवल ऑनलाइन माध्यम तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश योजनाओं के जरिए भी लोगों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था बाजार से कहीं अधिक रिटर्न का वादा करे, तो निवेश करने से पहले उसकी कानूनी स्थिति, कारोबार और वित्तीय रिकॉर्ड की पूरी जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, असामान्य लाभ का लालच अक्सर संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का संकेत होता है और समय रहते सतर्कता ही सबसे प्रभावी बचाव है।
