सिनालोआ कार्टेल के सह-संस्थापक इस्माइल ‘एल मायो’ जांबादा को अमेरिका में ड्रग तस्करी मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई जानी है।

राजकोट में अतिक्रमण हटाने के दौरान चाय-नाश्ते पर ₹47 लाख का बिल, मनपा में हड़कंप

Team The420
3 Min Read

गुजरात के राजकोट में अतिक्रमण हटाने के एक अभियान के दौरान चाय-नाश्ते पर ₹47 लाख का बिल सामने आने से नगर निगम (मनपा) में हड़कंप मच गया है। यह मामला फरवरी 2026 में जंगलेश्वर इलाके में चलाए गए तीन दिवसीय अतिक्रमण विरोधी अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और पुलिसकर्मी शामिल थे।

जानकारी के अनुसार, इस अभियान में लगभग 5,000 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि कई मशीनें भी काम में लगाई गई थीं। इसी दौरान चाय, नाश्ता और भोजन के नाम पर करीब ₹47 लाख का बिल मनपा को भेजा गया, जिसे देखकर अधिकारी हैरान रह गए।

बिल में दावा किया गया है कि अभियान के दौरान लगभग 21,000 कप चाय, 21,000 गिलास नींबू शिकंजी, बड़ी मात्रा में गांठिया-जलेबी और अन्य नाश्ते का सेवन किया गया। इसके अलावा मिनरल वाटर पर भी भारी खर्च दिखाया गया है, जिसकी राशि करीब ₹12 लाख 40 हजार बताई गई है।

FCRF Launches Certified AI-Powered SOC Analyst Program to Train the Next Generation of Cyber Defence Professionals

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेमवती रेस्टोरेंट के नाम से यह बिल नगर निगम को भेजा गया था। इसमें भोजन और नाश्ते पर लगभग ₹27 लाख और अन्य खर्चों को जोड़कर कुल राशि ₹47 लाख तक पहुंच गई। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि मिनरल वाटर की छोटी बोतल, जिसकी वास्तविक कीमत ₹5 बताई जाती है, उसे ₹8 प्रति बोतल के हिसाब से बिल में दर्शाया गया है।

इस खर्च को लेकर सवाल उठने के बाद नगर निगम की स्थायी समिति ने बिल को फिलहाल रोक दिया है और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे बिल की सत्यता, आपूर्ति रिकॉर्ड और वास्तविक खपत की जांच की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज है कि क्या यह वास्तव में प्रशासनिक अभियान का खर्च था या फिर बिलिंग में गंभीर अनियमितता हुई है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस पर सवाल उठाए हैं।

अभियान के दौरान जहां अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न नाश्ते और भोजन का उपयोग कर रहे थे, वहीं अब पूरे खर्च को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक खर्च कितना था और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।

हमसे जुड़ें

Share This Article