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जौहर ट्रस्ट पर आयकर जांच का शिकंजा और कड़ा: नौ ट्रस्टियों में पांच एक ही परिवार के, यूनिवर्सिटी निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप

Team The420
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लखनऊ। आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ अपनी 147 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त कर दिया है। विभाग की रिपोर्ट में वित्तीय, प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कई कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। इनमें निर्माण लागत में विसंगतियां, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, बिना स्वीकृति निर्माण, संदिग्ध दान और ट्रस्ट के संचालन पर एक ही परिवार के प्रभाव जैसे आरोप शामिल हैं।

आयकर विभाग के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर में कुल 59 इमारतों का निर्माण किया गया है, जिनकी अनुमानित निर्माण लागत ₹494.46 करोड़ आंकी गई है। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह लागत ट्रस्ट के वित्तीय अभिलेखों और बही-खातों में दर्शाए गए आंकड़ों से मेल नहीं खाती। विभाग निर्माण में प्रयुक्त धन के स्रोत तथा संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है।

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रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय की अधिकांश इमारतों का निर्माण आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना किया गया। जांच के अनुसार 59 भवनों में से केवल दो के नक्शे जिला पंचायत से स्वीकृत थे, जबकि शेष 57 भवन कथित रूप से बिना अनुमति के बनाए गए। रिपोर्ट में अग्निशमन विभाग की टिप्पणियों का भी उल्लेख है, जिनमें परिसर में अग्नि सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन की बात कही गई है।

आयकर विभाग ने ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट के कुल नौ ट्रस्टियों में से पांच सदस्य पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान के परिवार से संबंधित हैं, जबकि अन्य ट्रस्टियों की भूमिका कथित रूप से केवल औपचारिक थी। जांच के दौरान एक ट्रस्टी ने कथित तौर पर स्वयं को “डमी ट्रस्टी” बताते हुए कहा कि उनसे केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जाते थे और निर्णय प्रक्रिया में उनकी कोई वास्तविक भूमिका नहीं थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट का वास्तविक संचालन आजम खान और उनके परिवार के नियंत्रण में था।

जांच में विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोप भी दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में दर्ज बयानों के अनुसार कुछ सरकारी ठेकेदारों ने कथित रूप से स्वीकार किया कि सरकारी परियोजनाओं से प्राप्त धन का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय निर्माण में लगाया गया। विभाग ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ निजी निर्माण कंपनियों को सरकारी ठेके दिए गए और लगभग ₹86 करोड़ की सरकारी राशि का उपयोग ट्रस्ट की परिसंपत्तियों के निर्माण में किया गया, जिसका समुचित लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं मिला। इन आरोपों की जांच जारी है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय परिसर और ट्रस्ट की कुछ संपत्तियों का उपयोग कथित रूप से राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया। जांच में दर्ज एक बयान के अनुसार परिसर के एक हिस्से का उपयोग समाजवादी पार्टी के कार्यालय के रूप में किया जाता था और इसके लिए ट्रस्ट द्वारा कोई किराया नहीं लिया गया, जिससे आय का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि शैक्षणिक उद्देश्य के लिए आवंटित भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया, जो निर्धारित शर्तों का उल्लंघन माना गया है।

आयकर विभाग ने ट्रस्ट को प्राप्त दान पर भी सवाल उठाए हैं। विभाग का दावा है कि जिन कई व्यक्तियों और संस्थाओं को दानदाता बताया गया था, उनका सत्यापन करने पर उनका कोई स्पष्ट अस्तित्व या पता नहीं मिल सका। इनमें पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, सालार ओवरसीज लिमिटेड, एआर एजुकेशनल ट्रस्ट, अर्थ इंफ्राटेक, रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स, रॉयल एम्पोरिया इंफ्रा टेक, फैजा परवीन, मोहम्मद हसीब, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम शामिल बताए गए हैं। विभाग इन कथित दानों की प्रामाणिकता और दानदाताओं की वास्तविक पहचान की जांच कर रहा है।

वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में कुल 44 शैक्षणिक खंड हैं, जिनमें से 24 निर्माणाधीन बताए गए हैं, जबकि पांच इमारतों को पहले ही सील किया जा चुका है। आयकर विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार प्राप्त है।

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