कानपुर से जुड़े कथित ₹3,200 करोड़ के जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच गई है, जिससे राज्य कर विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मामला केवल फर्जी फर्मों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्क्रैप कारोबार, फर्जी बिलिंग, हवाला लेनदेन और शेल कंपनियों के जरिए हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नेटवर्क के संचालन की आशंका भी जताई जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कथित जीएसटी फर्जीवाड़ा लगभग ₹16,000 करोड़ के स्क्रैप कारोबार से जुड़ा हो सकता है। जांचकर्ताओं का मानना है कि जैसे-जैसे वित्तीय रिकॉर्ड की परतें खुलेंगी, संदिग्ध लेनदेन का दायरा बढ़कर लगभग ₹35,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि कथित कर चोरी का आंकड़ा ₹7,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना भी जांच के दायरे में है। मामले में राज्य कर विभाग के कम से कम 15 अधिकारी भी कथित मिलीभगत और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को लेकर जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं।
इस कथित बहु-करोड़ रुपये के नेटवर्क का खुलासा कानपुर के चकेरी क्षेत्र में हुई ₹24 लाख की लूट की जांच के दौरान हुआ। पुलिस जब लूटकांड की गहराई से जांच कर रही थी, तब कथित तौर पर फर्जी कंपनियों, संदिग्ध बैंक खातों और बड़े वित्तीय लेनदेन का ऐसा नेटवर्क सामने आया, जिसकी वित्तीय परतें ₹3,200 करोड़ से अधिक तक पहुंचती दिखाई दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने संभावित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू कर दी है और पुलिस तथा जीएसटी विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
पुलिस ने महफूज अली को इस कथित सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसके नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों का उपयोग कर करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन को अंजाम दिया। जांच के अनुसार कई कंपनियां चालकों, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और परिचितों के नाम पर पंजीकृत कराई गई थीं, जबकि उनका वास्तविक संचालन अन्य व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। मामले में कुछ जीएसटी प्रैक्टिशनर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ता और इस्पात कारोबारियों की भूमिका भी जांच एजेंसियों के रडार पर है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि पूरे वित्तीय नेटवर्क की पुष्टि हो जाती है, तो यह देश के सबसे बड़े कथित स्क्रैप आधारित जीएसटी फर्जीवाड़ों में से एक बन सकता है। अब तक 128 कंपनियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 54 कंपनियां सीधे तौर पर स्क्रैप कारोबार से जुड़ी बताई गई हैं। इन कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और लेनदेन का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों ने फरवरी 2026 में हुई एक अन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया है, जिसमें 425 संदिग्ध फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अधिकारियों के अनुसार इनमें से अधिकांश फर्में केवल कागजों पर संचालित हो रही थीं और कथित तौर पर स्क्रैप, लोहा एवं स्टील कारोबार के नाम पर फर्जी बिल जारी कर अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया जा रहा था। फिलहाल जांच एजेंसियां बैंकिंग ट्रेल, जीएसटी रिकॉर्ड, ई-वे बिल तथा शेल कंपनियों के नेटवर्क की फॉरेंसिक जांच कर कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में जुटी हैं।
मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर आरोपों की पड़ताल की जा रही है और संबंधित सभी व्यक्तियों एवं संस्थाओं को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायालय में विधिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही होगा।
