प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु के बहुचर्चित OMR शीट छेड़छाड़ मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और कोयंबटूर में 21 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई वर्ष 2017 में टीचर्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (TRB) द्वारा आयोजित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के लेक्चरर भर्ती परीक्षा घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत की गई।
ईडी की चेन्नई जोनल इकाई ने 23 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान संचालित किया। मामला तमिलनाडु के सबसे चर्चित भर्ती घोटालों में से एक माना जाता है।
जांच की शुरुआत 2017 में तमिलनाडु पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई थी। आरोप है कि परीक्षा के बाद OMR शीटों की स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने चयनित अभ्यर्थियों के नाम वाली 385 अतिरिक्त सेकेंडरी OMR शीटें तैयार करवाईं। इन शीटों का इस्तेमाल कथित रूप से डिजिटल रिकॉर्ड में बदलाव कर परीक्षा परिणामों में हेरफेर करने के लिए किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार इस कथित हेराफेरी के कारण 262 ऐसे अभ्यर्थियों को पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए योग्य घोषित कर दिया गया, जो वास्तव में चयन के पात्र नहीं थे। भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दायर जनहित याचिकाओं के बाद मामला सामने आया, जिसके चलते परिणामों की पुनर्समीक्षा की गई, चयन सूची वापस ली गई और आपराधिक जांच शुरू हुई।
मामले में पहली चार्जशीट वर्ष 2021 में दाखिल की गई थी, जबकि दूसरी पूरक चार्जशीट अक्टूबर 2023 में प्रस्तुत की गई।
ईडी के अनुसार जांच में सामने आया कि इस कथित साजिश का नेतृत्व वी. सुब्रमणियन और उनके सहयोगी सुरेश पॉल ने किया। आरोप है कि उन्हें एम/एस डाटाटेक से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों शेख दाऊद नासर और आई. राघुपति का सहयोग प्राप्त था। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी कर आर्थिक लाभ अर्जित किया।
जांच में यह भी सामने आया कि एजेंटों और बिचौलियों का एक नेटवर्क इच्छुक अभ्यर्थियों से संपर्क करता था और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर प्रति उम्मीदवार ₹14 लाख से ₹16 लाख तक नकद वसूलता था। कथित तौर पर यह धन म्यूल बैंक खातों, प्रॉक्सी फर्मों—ट्रस्ट एंटरप्राइजेज, विजडम एंटरप्राइजेज और सूरियम एंटरप्राइजेज—तथा सहयोगियों और परिजनों के खातों के माध्यम से घुमाया जाता था।
ईडी का आरोप है कि बाद में इस धन को वैध दिखाने के लिए अचल संपत्तियों और आभूषणों में निवेश किया गया। तलाशी अभियान का उद्देश्य इसी कथित अपराध से अर्जित आय का पता लगाना और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच करना था।
छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। इनमें कथित रूप से एजेंटों और आरोपियों द्वारा रखे गए नकद संग्रह के रिकॉर्ड, विभिन्न सरकारी परीक्षाओं से संबंधित OMR शीटों की कार्बन प्रतियां, अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की प्रतियां और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं।
ईडी ने बताया कि तलाशी के दौरान ₹13.18 लाख नकद भी जब्त किए गए। इसके अलावा जांच के तहत 56 बैंक खातों और दो डीमैट खातों को फ्रीज कर दिया गया है।
एजेंसी ने 36 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जो आरोपियों और उनके सहयोगियों के नाम पर बताई जा रही हैं। इन संपत्तियों का सरकारी गाइडलाइन मूल्य लगभग ₹9.67 करोड़ है, जबकि इनका अनुमानित बाजार मूल्य ₹20 करोड़ से अधिक बताया गया है।
जांच एजेंसी का मानना है कि जब्त किए गए दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड कथित धन शोधन नेटवर्क, लाभार्थियों और भर्ती घोटाले से अर्जित आर्थिक लाभ की पूरी तस्वीर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित लाभार्थियों, संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
