भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के बहुचर्चित श्री आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चौंकसे समूह से जुड़े 12 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है। जांच एजेंसी ने इस दौरान लगभग ₹3.97 करोड़ नकद, ₹3.45 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण तथा बड़ी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।
ईडी की भोपाल जोनल इकाई ने 23 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान संचालित किया। कार्रवाई के दायरे में एक बैंक लॉकर सहित कुल 12 परिसर शामिल रहे। इनमें आवासीय भवन, कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, ट्रस्ट और व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे, जिनका संबंध चौंकसे समूह और मामले के आरोपियों से बताया गया है।
मामले की जांच उस प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी, जिसे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने जयनारायण चौंकसे और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया था। आरोप है कि श्री आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी के धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और गबन किया गया।
ईडी के अनुसार जांच में सामने आया कि श्री आस्था फाउंडेशन फॉर एजुकेशन सोसायटी कई शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों का संचालन करती है तथा इसका नियंत्रण चौंकसे परिवार के सदस्यों और उनके सहयोगियों के पास था। जांच में यह भी पाया गया कि छात्रों से प्राप्त फीस, छात्रवृत्ति अनुदान और सोसायटी व उससे जुड़े संस्थानों के नाम पर लिए गए बैंक ऋणों की राशि को कथित रूप से संबंधित ट्रस्टों, कंपनियों और अन्य संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया, जिन पर आरोपियों का नियंत्रण था।
तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले। ईडी ने विभिन्न परिसरों से लगभग ₹3.97 करोड़ नकद बरामद कर जब्त किया। इसके अलावा मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, ईआरपी और टैली से संबंधित डेटा, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी कब्जे में ली गई।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि तलाशी के दौरान लगभग ₹3.45 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त अचल संपत्तियों से संबंधित कई दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से धन के प्रवाह, निवेश और कथित रूप से अर्जित संपत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच की जाएगी ताकि धन के स्रोत, उसके उपयोग और विभिन्न संस्थाओं के बीच हुए लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की जा सके। जांच एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित रूप से डायवर्ट की गई राशि का उपयोग किन परिसंपत्तियों के निर्माण या अधिग्रहण में किया गया।
मामले को शिक्षा और सामाजिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं के रूप में देखा जा रहा है। जांच का फोकस उन वित्तीय लेनदेन पर है जिनके जरिए संस्थागत धन को संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों तक पहुंचाए जाने का संदेह है।
ईडी ने कहा है कि मामले में जांच अभी जारी है और जब्त किए गए दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों तथा वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के आगामी चरणों में और वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल एजेंसी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की जाएगी।
