अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे के कथित गबन मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ नामजद आरोपियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला राम जन्मभूमि थाने में दर्ज किया गया है और जांच एजेंसियों ने आरोपों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
प्राथमिकी ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के प्रबंधन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में कथित अनियमितताएं हुईं, जिससे ट्रस्ट को नुकसान पहुंचा। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई का निर्णय लिया।
मामले में नामजद आरोपियों में रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश शामिल हैं। एक अन्य आरोपी की पहचान की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। प्राथमिकी में कुछ अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप शामिल हैं। आरोपों की पुष्टि के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। ट्रस्ट ने मंदिर में प्राप्त चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोपों की जांच की मांग की थी। इसके बाद एसआईटी ने प्रारंभिक जांच शुरू की और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों का परीक्षण किया।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था और न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की थी। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
उधर, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई केवल उपलब्ध तथ्यों और एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांच के अगले चरण में संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ, बैंक खातों की जांच, वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड का ऑडिट किया जा सकता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और क्या इसमें किसी संगठित साजिश की भूमिका थी।
मामला अभी जांच के अधीन है और किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। कानून के अनुसार सभी आरोपी तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हो जाते। जांच आगे बढ़ने के साथ इस बहुचर्चित मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
