लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा और दान राशि से जुड़े कथित गबन मामले में जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में 17 लोगों को आरोपी के रूप में नामित किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम भी शामिल होने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, SIT ने अपनी जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया है और मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की है। साथ ही मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन तथा प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को प्रशासक नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है।
बुधवार को SIT की टीम आगे की जांच के लिए अयोध्या पहुंची। जांच के दौरान दान पेटियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, दान पेटियों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के कब्जे से बरामद होने की बात जांच में सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चाबियां उनके पास कैसे पहुंचीं और उनका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामले में लगभग 150 सेवादारों और कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई है। आरोप है कि जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से इनमें से कई लोगों की आर्थिक स्थिति में असामान्य रूप से तेज बदलाव देखने को मिला। जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों की संपत्तियों और वित्तीय गतिविधियों की भी समीक्षा की गई है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिए गए हैं कि कथित अनियमितताएं लंबे समय से चल रही हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ सेवादारों और कर्मचारियों को कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इस बारे में खुलकर शिकायत नहीं की। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गबन का स्वरूप क्या था, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और दान राशि के प्रबंधन में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं।
इससे पहले राज्य सरकार ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। टीम को मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब मामले की जांच अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है।
मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। मंदिर से जुड़ी वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी आरोपों और तथ्यों का विधिवत सत्यापन किया जाएगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, SIT की विस्तृत जांच और संभावित एफआईआर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
