राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों की ओर संकेत किया गया है। जांच के दौरान दानराशि की सुरक्षा, सोने-चांदी के आभूषणों के अभिलेखीकरण, नियुक्तियों की प्रक्रिया, खरीद व्यवस्था तथा प्रसाद वितरण प्रणाली में कथित अनियमितताओं और कमियों का उल्लेख किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकद दानराशि को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था मौजूद नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता है। जांच टीम का मानना है कि वित्तीय प्रबंधन से जुड़े संवेदनशील कार्यों में बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।
रिपोर्ट में श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आने की बात कही गई है जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण, अभिलेखीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। जांचकर्ताओं ने इस क्षेत्र में डिजिटल रिकॉर्डिंग और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता जताई है।
SIT ने मंदिर प्रशासन में हुई कुछ नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में चयन प्रक्रिया निर्धारित मानकों और योग्यता आधारित प्रणाली के अनुरूप नहीं पाई गई। जांच टीम का मानना है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता और स्पष्ट पात्रता मानकों का पालन प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत जवाबदेही के लिए आवश्यक है।
सामग्री खरीद और आपूर्ति व्यवस्था भी जांच के दायरे में रही। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कुछ मामलों में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुपालन को लेकर प्रश्न उठे हैं। जांच के दौरान ऐसे संकेत मिलने की बात भी कही गई है जिनसे कुछ खरीद मामलों में कमीशनखोरी या प्रक्रियागत अनियमितताओं की आशंका व्यक्त की गई है। हालांकि इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।
प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन को लेकर भी जांच में कई कमियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ अवसरों पर खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद बाजार मूल्य की तुलना में अधिक दरों पर किए जाने के संकेत मिले हैं। इससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं।
सूत्रों का कहना है कि SIT ने शासन को सौंपे गए अपने प्रारंभिक निष्कर्षों में सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में नियमित ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार जैसे उपायों पर भी बल दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े धार्मिक या सार्वजनिक संस्थान में वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल रिकॉर्ड, स्वतंत्र ऑडिट और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था न केवल अनियमितताओं को रोकने में मदद करती है बल्कि श्रद्धालुओं और हितधारकों का विश्वास भी मजबूत करती है।
फिलहाल शासन स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा के बाद आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। जांच का दायरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आगे की जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आने की भी संभावना बनी हुई है।
