फर्जी कंपनियों के जरिए ₹14 करोड़ के लेन-देन का खुलासा, तीन गिरफ्तार; बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत और कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच जारी

बरेली में हवाला और ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़: केरल तक पहुंचे ₹88 लाख, तमिलनाडु से हुई निकासी, बैंकिंग सिस्टम की भूमिका पर सवाल

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By Roopa
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बरेली। शाही क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े संगठित हवाला और ठगी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह कॉल सेंटर की आड़ में काम कर रहा था और हवाला कारोबार के साथ-साथ साइबर ठगी तथा आईपीएल सट्टेबाजी जैसे मामलों में भी सक्रिय हो सकता है।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान जितेंद्र कुमार (सैनिक कॉलोनी, बारादरी), हिमांशु पटेल (बिथरी चैनपुर) और आसिफ (गांव अधकटा रब्बानी बेगम, नवाबगंज) के रूप में हुई है। वहीं, गिरोह के कथित सरगना सागर, फाजिल और विशाल पटेल समेत कई अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

जांच के दौरान यह सामने आया कि इस पूरे रैकेट ने ‘कुमार एनर्जी इंटरप्राइजेज’ और ‘शुभम मंगलम’ नाम से दो फर्जी शेल कंपनियां बनाई थीं। इन्हीं कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग राज्यों से भारी मात्रा में रकम मंगाई और भेजी जा रही थी। प्रारंभिक जांच में ही सितंबर 2025 के दौरान लगभग ₹14 करोड़ के लेन-देन की पुष्टि हुई है।

इस नेटवर्क का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि ‘कुमार एनर्जी’ नामक खाते में आए लगभग ₹88 लाख को केरल की एक फर्म को ट्रांसफर किया गया, जहां से यह राशि कोल्लम जिले के पुनल्लूर क्षेत्र में बैंकिंग चैनल के जरिए नकद में निकाली गई। इसी तरह ‘शुभम मंगलम’ फर्म के खाते में आए धन को तमिलनाडु भेजकर वहां से भी कैश में निकासी की गई, जिससे पूरे लेन-देन का उद्देश्य धन को वैध दिखाना और ट्रेल को छिपाना था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे खेल में बैंकिंग सिस्टम के कुछ स्तरों पर गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत रही है। जिन खातों के जरिए इतना बड़ा लेन-देन हुआ, वे सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित एक बैंक शाखा में खोले गए थे। आरोप है कि बैंक स्तर पर उचित निगरानी और संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग नहीं की गई, जिसके चलते यह नेटवर्क लंबे समय तक बिना रोकटोक के चलता रहा।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच का विषय है कि क्या बैंक प्रबंधन या कुछ कर्मचारियों की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध रही है। फिलहाल इस पहलू पर गहन जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल जारी है।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह एक संगठित संरचना के तहत काम करता था, जिसमें फर्जी कंपनियां खोलने से लेकर खातों के संचालन और रकम के ट्रांसफर तक अलग-अलग लोग जिम्मेदारी निभाते थे। इसके अलावा कॉल सेंटर आधारित नेटवर्क के जरिए लोगों को झांसे में लेकर ठगी और अवैध वसूली के भी इनपुट मिले हैं।

पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें और स्पष्ट होंगी। शुरुआती जांच में यह भी संभावना जताई जा रही है कि यह गिरोह कई अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है और इसके तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं।

जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से जिस तरह से रकम को घुमाया गया, वह एक सुनियोजित हवाला मॉडल की ओर इशारा करता है। पुलिस अब सभी डिजिटल और वित्तीय ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच भी कर रही है।

फिलहाल पुलिस ने तीनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितनी बड़ी रकम देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाई और निकाली जा चुकी है।

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