बेंगलुरु में ऑनलाइन निवेश ठगी के दो अलग-अलग मामलों में प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले दो कर्मचारियों को मिलाकर करीब ₹2.6 करोड़ की चपत लग गई। दोनों मामलों में साइबर ठगों ने समान तरीके अपनाकर पीड़ितों को लंबे समय तक निवेश के लिए फंसाया।
पहले मामले में HBR लेआउट निवासी 38 वर्षीय एक कर्मचारी को टास्क-बेस्ड निवेश स्कीम के जरिए ठगा गया। शिकायत के अनुसार, जनवरी 2024 में पीड़ित के व्हाट्सऐप पर एक अज्ञात नंबर से मैसेज आया, जिसमें एक लिंक भेजा गया था। इस लिंक के जरिए एक ऐप डाउनलोड कराया गया, जिसमें छोटे-छोटे ऑनलाइन टास्क पूरे करने पर कमीशन देने का दावा किया गया था।
पीड़ित को शुरुआत में ₹1,000 से ₹50,000 तक छोटे निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। ऐप पर लगातार “लाभ” दिखाया जाता रहा, जिससे उसे प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ता गया। इसी भरोसे के चलते उसने समय-समय पर बड़ी रकम निवेश की। जनवरी 2024 से मई 2026 के बीच उसने कुल ₹1,21,99,000 विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
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पुलिस के अनुसार, पीड़ित को ऐप पर लगातार मुनाफा दिखने के कारण यह प्लेटफॉर्म असली लगा। लेकिन जब उसने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उसे पैसा वापस नहीं मिला और उसे ठगी का एहसास हुआ। मामले में राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई है और जांच शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि ऐसे ऐप्स से सावधान रहें जो छोटे कामों के बदले असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करते हैं। साइबर अपराधी अक्सर इसी तरह के लालच और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाते हैं।
दूसरे मामले में एक अन्य कर्मचारी को फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ₹1.39 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया। शिकायत के मुताबिक, पीड़ित की पहचान टेलीग्राम पर “Nisha Sharma” नाम की एक महिला से हुई, जिसने उसे निवेश के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में पीड़ित को छोटे निवेश कराए गए और फिर फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड पर भारी मुनाफा दिखाया गया। धीरे-धीरे उसे बड़ी रकम लगाने के लिए राजी किया गया और कुल मिलाकर उसने लगभग ₹1.39 करोड़ निवेश कर दिए। प्लेटफॉर्म पर लगभग ₹4.5 करोड़ का फर्जी बैलेंस दिखाया गया, जिसमें कथित मुनाफा भी शामिल था।
जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उससे कहा गया कि पहले ₹92.5 लाख “इनकम टैक्स” के रूप में जमा करना होगा। इसी मांग के बाद उसे शक हुआ कि पूरा मामला धोखाधड़ी का है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों मामलों में साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया, फर्जी ऐप और नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर एक संगठित ठगी नेटवर्क के तहत काम किया है। ये गिरोह पहले छोटे मुनाफे दिखाकर भरोसा बनाते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर पीड़ितों को ब्लॉक कर देते हैं या अतिरिक्त भुगतान की मांग करते हैं।
साइबर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध निवेश प्लेटफॉर्म निकासी (withdrawal) के लिए अग्रिम शुल्क या टैक्स की मांग नहीं करता। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान निवेश ऑफर या मैसेज पर भरोसा न करें और निवेश से पहले पूरी तरह सत्यापन जरूर करें।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और बैंक ट्रांजैक्शन व डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
