सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर ‘दोमुंहा सांप’ (रेड सैंड बोआ) को ₹15 लाख में बेचने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर रहा था। आरोपी की पहचान आस मोहम्मद निवासी शिवधाम कॉलोनी के रूप में हुई है, जिसे अंबाला रोड पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक संगठित गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहा था, जो फर्जी पहचान, लग्जरी जीवनशैली के दिखावे और सांप के औषधीय गुणों के झूठे दावों के जरिए लोगों को जाल में फंसाता था। यह गिरोह सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर यह विश्वास दिलाता था कि यह दुर्लभ सांप बेहद कीमती और इलाज में उपयोगी है, जिसके चलते कई लोग मोटी रकम गंवा बैठे।
FCRF Launches Chief AI Officer Certification to Build India’s AI Governance Leaders
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से ₹4.94 लाख नकद, एक ऑडी कार, दो रेड सैंड बोआ सांप, नोट गिनने की मशीन, 147 गड्डियां नकली/मनोरंजन नोट, 145 खाली कागजों की गड्डियां और दो फर्जी आधार कार्ड बरामद किए। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन सामानों का इस्तेमाल लोगों पर रौब जमाने और खुद को बड़े कारोबारी के रूप में पेश करने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी अलग-अलग फर्जी नामों से लोगों से संपर्क करता था और “आशु गोयल” जैसे नामों से नकली आधार कार्ड बनवाकर अपनी असली पहचान छिपाता था। वह खुद को हाई-लेवल वाइल्डलाइफ ट्रेड से जुड़ा व्यापारी बताकर देश के कई राज्यों में लोगों से संपर्क करता था।
पूछताछ में आस मोहम्मद ने स्वीकार किया कि उसने और उसके साथियों ने हाल ही में एक ‘दोमुंहा सांप’ को ₹15 लाख में बेचा था। उसके अनुसार, सौदे के बाद उसके साथियों ने ₹5-5 लाख ले लिए, जबकि उसके हिस्से में आई रकम में से खर्च काटकर ₹4.94 लाख बचा, जिसे पुलिस ने बरामद किया है। हालांकि पुलिस को संदेह है कि यह पूरा नेटवर्क एक बड़े संगठित साइबर और वन्यजीव तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लोगों को प्रभावित करने के लिए नकली नोटों की गड्डियां और खाली कागजों का इस्तेमाल करता था, ताकि वह करोड़ों के कारोबार का झूठा प्रभाव बना सके। वह खुद को बड़ा बिजनेसमैन बताकर विश्वास जीतता था और फिर निवेश या खरीद के नाम पर ठगी करता था।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रेड सैंड बोआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसकी खरीद-बिक्री पूरी तरह अवैध है। इस आधार पर आरोपी पर धोखाधड़ी के साथ-साथ वन्यजीव तस्करी के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों में फैला हो सकता है। पुलिस अब फरार साथियों की तलाश में जुटी है और सांपों की सप्लाई चेन तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले स्रोतों की जांच कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी आधार कार्ड किसी अवैध आधार केंद्र या नेटवर्क के जरिए बनाए गए थे या नहीं। साथ ही डिजिटल और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि ऐसे गिरोह लोगों की लालच, अंधविश्वास और जानकारी की कमी का फायदा उठाकर फर्जी दावे करते हैं। इस मामले ने एक बार फिर वन्यजीव तस्करी और धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के अवैध वन्यजीव व्यापार या संदिग्ध बड़े मुनाफे के दावों से दूर रहें और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। मामले की जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
