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बीएड प्रवेश परीक्षा फर्जीवाड़ा: सीतामढ़ी से कोचिंग संचालक समेत दो गिरफ्तार, डमी कैंडिडेट से पास कराने का रैकेट उजागर

Team The420
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बीएड प्रवेश परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई में सीतामढ़ी से एक निजी कोचिंग संचालक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास कराने का संगठित रैकेट चला रहे थे। यह पूरा नेटवर्क फर्जी एडमिट कार्ड तैयार करने, पहचान बदलकर परीक्षा में शामिल कराने और मोटी रकम वसूलने के लिए सक्रिय था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रीगा थाना क्षेत्र के शिवनगर निवासी ईश्वर चंद्र प्रसाद के पुत्र हिमांशु सिंह और बाजपट्टी थाना क्षेत्र के धनकौल निवासी अब्दुल सत्तार के पुत्र मुर्शीद अंसारी के रूप में हुई है। दोनों को कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली क्षेत्र की पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पकड़ा।

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जांच में सामने आया है कि हिमांशु सिंह शहर के रिंग बांध इलाके में ‘एडमिशन कैंपस’ नाम से एक कंसल्टेंसी/कोचिंग संस्थान संचालित करता था। इसी संस्थान के जरिए वह छात्रों और अभिभावकों को परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। आरोप है कि यह गिरोह बीएड, डीएलएड समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की रकम वसूलता था।

सूत्रों के अनुसार, गिरोह की कार्यप्रणाली काफी संगठित थी। पहले अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें “गैरकानूनी लेकिन गारंटीड पास” का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद उनके स्थान पर फर्जी अभ्यर्थी यानी डमी कैंडिडेट परीक्षा केंद्रों में बैठाए जाते थे। इसके लिए फर्जी पहचान पत्र और एडमिट कार्ड तैयार किए जाते थे, ताकि परीक्षा प्रणाली को धोखा दिया जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई ऐसी कंसल्टेंसी लंबे समय से सक्रिय हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का दावा करती हैं। इन संस्थानों पर पहले भी फर्जीवाड़े और छात्रों को गुमराह करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इस स्तर पर गिरफ्तारी हुई है।

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क बनाकर काम कर रहे थे। वे सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए छात्रों तक पहुंच बनाते थे और उन्हें भरोसे में लेकर एडवांस पेमेंट लेते थे। कई मामलों में फर्जी एडमिट कार्ड तैयार कर परीक्षा से पहले ही पूरी सेटिंग कर ली जाती थी।

गिरफ्तारी के बाद कंसल्टेंसी संचालकों में हड़कंप मच गया है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘एडमिशन कैंपस’ नामक संस्थान गिरफ्तारी के बाद भी कुछ समय तक खुला देखा गया। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि रैकेट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और इसके अन्य सदस्य अभी भी सक्रिय हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है। साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने में इस्तेमाल किए गए स्रोतों और डिजिटल माध्यमों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हैं। यह न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन करता है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के संगठित रैकेट के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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