भुवनेश्वर। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे ओडिशा कैडर के IAS अधिकारी धिमन चकमा को राज्य सरकार ने पुनः सेवा में बहाल कर नई जिम्मेदारी सौंप दी है। करीब एक वर्ष तक निलंबित रहने के बाद उन्हें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में उप सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। हालांकि राज्य सरकार ने साफ किया है कि यह कदम केवल सेवा नियमों के तहत उठाया गया प्रशासनिक निर्णय है और इससे उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच या न्यायिक कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
धिमन चकमा, 2021 बैच के IAS अधिकारी हैं। वर्ष 2025 में वे कालाहांडी जिले के धर्मगढ़ में उप-जिलाधिकारी (सब-कलेक्टर) के पद पर तैनात थे। इसी दौरान उन पर एक स्टोन क्रशर कारोबारी से ₹10 लाख की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। आरोपों के आधार पर सतर्कता विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें कथित तौर पर रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया था। यह मामला उस समय राज्य के प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना था।
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गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों ने उनके सरकारी आवास की तलाशी भी ली थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने वहां से लगभग ₹47 लाख नकद बरामद करने का दावा किया था। इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार ने 10 जून 2025 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच आरंभ हुई।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था। बाद में जुलाई 2025 में उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी। जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय जांच और भ्रष्टाचार से संबंधित आपराधिक मुकदमा दोनों जारी रहे। पिछले एक वर्ष से अधिक समय से वे निलंबन की स्थिति में थे और उनके मामले की समीक्षा की जा रही थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक निलंबन में रहने वाले अधिकारियों के मामलों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। सेवा नियमों के तहत धिमन चकमा के मामले का भी परीक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें पुनः सेवा में लेने का निर्णय लिया गया। इसी प्रक्रिया के तहत उन्हें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में उप सचिव के रूप में पदस्थापित किया गया है।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह बहाली किसी प्रकार की राहत या आरोपों से मुक्ति का संकेत नहीं है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पूर्ववत जारी रहेगी। इसके अलावा भ्रष्टाचार मामले में अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया भी स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगी। दोनों प्रक्रियाओं के परिणामों का उनकी भविष्य की सेवा स्थिति पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के मामलों में केवल निलंबन की अवधि के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। यदि जांच या मुकदमे की प्रक्रिया लंबी चलती है तो सेवा नियमों के अनुसार संबंधित अधिकारी को किसी पद पर पुनः तैनात किया जा सकता है, जबकि उनके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई समानांतर रूप से जारी रहती है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत के अंतिम फैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो नियमों के अनुसार कठोर प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि अधिकारी को आरोपों से राहत मिलती है तो उसका प्रभाव उनकी सेवा स्थिति पर पड़ेगा।
फिलहाल धिमन चकमा की बहाली और नई पोस्टिंग को लेकर प्रशासनिक एवं राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। लेकिन सरकार का कहना है कि यह निर्णय केवल सेवा नियमों के अनुपालन में लिया गया है और भ्रष्टाचार मामले से जुड़े सभी आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
