लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े रियल एस्टेट निवेश घोटाले में अहम सफलता हासिल की है। एजेंसी ने लगभग ₹100 करोड़ के कथित पोंजी स्कीम घोटाले में एक मुख्य डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है, जबकि मामले से जुड़े पांच अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 50 वर्षीय महिपाल सिंह के रूप में हुई है, जो मथुरा जिले के छटिकारा गांव का निवासी है। अधिकारियों के अनुसार, महिपाल सिंह को 6 जून को एक राज्यव्यापी अभियान के दौरान पकड़ा गया। वह लंबे समय से फरार था और उस पर केस क्राइम नंबर 03/2023 तथा जांच संख्या 44/2023 के तहत मामला दर्ज था।
EOW ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग और आपराधिक साजिश शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का हिस्सा है।
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कई जिलों में फैली फर्जी निवेश योजना
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला कथित तौर पर ‘कर्मभूमि रियल एस्टेट कंपनी लिमिटेड’ के जरिए चलाया जा रहा था, जो कानपुर में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के तहत पंजीकृत थी। कंपनी ने 2011 से 2015 के बीच मथुरा, कानपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी जैसे कई जिलों में निवेश योजनाएं चलाईं।
आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों को जमीन और फ्लैट देने के नाम पर आकर्षक स्कीमों का प्रचार किया और कम समय में पैसे दोगुने करने जैसे वादों के जरिए लोगों को फंसाया। शुरुआती स्तर पर कई निवेशकों ने भरोसा कर बड़ी रकम निवेश कर दी।
₹100 करोड़ की ठगी का अनुमान
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब ₹100 करोड़ की रकम जुटाई गई। लेकिन बाद में न तो निवेशकों को प्लॉट या फ्लैट दिए गए और न ही उनका पैसा लौटाया गया। इससे सैकड़ों निवेशक आर्थिक संकट में आ गए।
EOW अधिकारियों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के डायरेक्टरों ने फर्जी दस्तावेज, भ्रामक विज्ञापन और झूठे वादों का सहारा लेकर निवेशकों का विश्वास जीता। एकत्र की गई रकम को वास्तविक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाने के बजाय अन्य माध्यमों से कथित रूप से डायवर्ट कर दिया गया।
अचानक ऑफिस बंद कर फरार हुए आरोपी
जांच में यह भी पता चला है कि भारी रकम जुटाने के बाद कंपनी के दफ्तर अचानक बंद कर दिए गए और प्रमोटर फरार हो गए। इसके बाद निवेशकों के पास कोई ठोस जवाब नहीं बचा और मामला धीरे-धीरे बड़े वित्तीय अपराध में बदल गया।
EOW ने बताया कि महिपाल सिंह कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों को धोखा देने की योजना में शामिल था।
फाइनेंशियल ट्रेल और संपत्तियों की जांच जारी
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। बैंक खातों, संपत्ति रिकॉर्ड और लेनदेन की पूरी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसा किन-किन माध्यमों से ट्रांसफर हुआ।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस घोटाले से जुड़े अन्य लाभार्थी भी मौजूद हैं और क्या संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
बाकी आरोपियों की तलाश तेज
EOW ने कहा है कि बाकी पांच फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां संभव हैं।
एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी वैधता और नियामक मंजूरी की जांच जरूर करें, खासकर उन योजनाओं में जो असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करती हैं।
मामले की विस्तृत चार्जशीट वित्तीय ऑडिट और फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद दाखिल की जाएगी।
