मुंबई/शिरडी। महाराष्ट्र में सामने आए बहु-करोड़ भूमि और वित्तीय धोखाधड़ी मामले की जांच लगातार गहराती जा रही है। राहाता कोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपी अशोक खरात को 9 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यह मामला अब केवल जमीन खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन, फर्जी क्रेडिट खातों और संभावित संगठित वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं।
शिरडी पुलिस ने अशोक खरात को नासिक से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। जांच एजेंसी ने दलील दी कि इस मामले में गहराई से पूछताछ जरूरी है, ताकि पूरे धन प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके। अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार करते हुए हिरासत 9 मई तक बढ़ा दी।
अधिकारियों के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र ₹5.52 करोड़ के फंड ट्रेल की पहचान करना है। यह पता लगाया जा रहा है कि यह राशि वैध रूप से घोषित की गई थी या नहीं और क्या इसे आयकर विभाग के रिकॉर्ड में सही तरीके से दिखाया गया था। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि कहीं यह पैसा जटिल बैंकिंग संरचनाओं के जरिए छिपाया तो नहीं गया।
यह मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता रावसाहेब गोंडकर ने आरोप लगाया कि शिरडी में 4.5 एकड़ जमीन, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹50 करोड़ बताई जाती है, उसे केवल ₹5.5 करोड़ में संदिग्ध तरीके से खरीदा गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस सौदे के पीछे वित्तीय हेरफेर और दबाव आधारित लोन संरचनाओं का इस्तेमाल किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि अशोक खरात और उनकी पत्नी कल्पना खरात के नाम पर कई संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन हुए हैं। कल्पना खरात फिलहाल फरार हैं और पुलिस को आशंका है कि वे पूरे वित्तीय नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उनकी तलाश के लिए पूछताछ तेज कर दी गई है।
अब तक की जांच में कुल 14 वित्तीय लेन-देन, जिनकी राशि ₹5.52 करोड़ है, सामने आए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये लेन-देन इस तरह से संरचित किए गए थे ताकि धन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके। पैटर्न से यह भी संकेत मिलता है कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग जैसी संरचना हो सकती है।
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साथ ही, समता क्रेडिट सोसाइटी से जुड़े एक अलग पहलू की भी जांच चल रही है, जहां आरोप है कि 57 लोगों के नाम पर लगभग 100 बैंक खाते खोले गए और सभी में अशोक खरात को एकमात्र नॉमिनी दिखाया गया। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या ये खाते बिना उचित सहमति और दस्तावेजों के बनाए गए थे।
जांच में सोसाइटी के अधिकारियों और निदेशकों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक फॉर्म और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री को खंगाला जा रहा है ताकि प्रक्रिया में हुई संभावित अनियमितताओं को उजागर किया जा सके।
कल्पना खरात की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, लेकिन वे अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। अधिकारियों का मानना है कि उनकी पूछताछ इस पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझने के लिए बेहद अहम है।
एक वरिष्ठ साइबर और वित्तीय जांच विशेषज्ञ प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह (पूर्व IPS अधिकारी) ने कहा कि ऐसे मामलों में “लेयर्ड फाइनेंशियल इंजीनियरिंग, पहचान का दुरुपयोग और अनौपचारिक लोन नेटवर्क” की भूमिका अक्सर सामने आती है। उनके अनुसार, पूरे फंड ट्रेल और लाभार्थियों की पहचान करना ही ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की कुंजी है।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को केवल एक जमीन सौदे से आगे बढ़ाकर एक संभावित संगठित वित्तीय अपराध नेटवर्क के रूप में देख रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
