कंबोडिया भेजकर युवक को फंसाने का आरोप, EOW ने दर्ज किया मामला; ऑनलाइन नौकरी के नाम पर वसूली और संगठित नेटवर्क की जांच तेज

फर्जी जॉब ऑफर से मानव तस्करी तक: श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय रैकेट का खुलासा

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By Roopa
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श्रीनगर में फर्जी नौकरी के नाम पर एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और धोखाधड़ी रैकेट का बड़ा मामला सामने आया है। इस नेटवर्क ने एक युवक को बेहतर विदेश नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेज दिया, जहां उसे कथित तौर पर कठिन परिस्थितियों में फंसा दिया गया। मामले में Economic Offences Wing (EOW) श्रीनगर ने प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह पूरा गिरोह ऑनलाइन जॉब ऑफर्स, सोशल मीडिया विज्ञापनों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए सक्रिय था। आरोपी पहले बेरोजगार युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को आकर्षक वेतन और विदेश में बेहतर जीवन का लालच देते थे। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता था।

पीड़ित युवक को भी इसी तरह एक कथित विदेशी नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था, जिसमें उच्च वेतन और आसान भर्ती प्रक्रिया का दावा किया गया। शुरुआत में उसे भरोसा दिलाया गया कि चयन पूरी तरह वैध है और कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही है।

इसके बाद आरोपी व्यक्तियों ने वीजा प्रोसेसिंग, यात्रा व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर कई चरणों में पैसे वसूले। पीड़ित से लगातार विभिन्न खातों में राशि ट्रांसफर करवाई गई, जिससे वह आर्थिक रूप से कमजोर हो गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह एक संगठित नेटवर्क है जो पहले ऑनलाइन नौकरी पोर्टल्स, फेसबुक पेज, टेलीग्राम चैनल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए लोगों को टारगेट करता है। जैसे ही कोई व्यक्ति संपर्क में आता है, उसे विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर आगे की प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाता है।

कंबोडिया पहुंचने के बाद पीड़ित को ऐसी स्थिति में रखा गया, जहां उससे जबरन काम करवाने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल साइबर धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानव तस्करी और अवैध भर्ती नेटवर्क का गंभीर पहलू भी जुड़ा हुआ है।

EOW अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के रैकेट तेजी से बढ़ रहे हैं और इनमें मुख्य रूप से युवाओं को निशाना बनाया जाता है। खासकर वे लोग जो विदेश में रोजगार की तलाश में रहते हैं, ऐसे गिरोहों के लिए आसान शिकार बन जाते हैं।

जांच में यह भी सामने आ रहा है कि पैसे को कई लेयर में अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से ट्रांसफर किया गया है, ताकि अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके। एजेंसियां अब इन सभी वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन चैनलों की जांच कर रही हैं।

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अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के अन्य राज्यों और संभवतः विदेशी गिरोहों से जुड़े होने की भी संभावना है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। कई संदिग्ध बैंक खातों को ट्रेस किया जा रहा है और डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अपराधों का पैटर्न लगातार बदल रहा है। पहले केवल ऑनलाइन ठगी होती थी, लेकिन अब यह नेटवर्क मानव तस्करी और अवैध विदेश भेजने जैसे गंभीर अपराधों तक फैल चुका है।

इस पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी दी है कि ऐसे गिरोह पहले भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे पीड़ित को आर्थिक और मानसिक दबाव में ले आते हैं। उनके अनुसार, “आज के समय में साइबर ठग तकनीक से ज्यादा मानव मनोविज्ञान और लालच का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए बिना सत्यापन किसी भी नौकरी ऑफर पर भरोसा करना सबसे बड़ा जोखिम है।”

साइबर और क्राइम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी समस्या है। लोग बिना सत्यापन के किसी भी विदेशी नौकरी ऑफर पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे वे आसानी से ठगों के जाल में फंस जाते हैं।

जांच एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी विदेशी नौकरी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। कंपनी का रजिस्ट्रेशन, भर्ती एजेंसी की वैधता और सरकारी मान्यता की पुष्टि करना जरूरी है।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में वीजा या नौकरी के नाम पर अज्ञात व्यक्तियों को पैसे नहीं भेजने चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करना चाहिए।

EOW श्रीनगर ने कहा है कि जांच जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस गिरोह ने पहले कितने लोगों को निशाना बनाया है।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि डिजिटल युग में फर्जी नौकरी ऑफर कितने खतरनाक हो सकते हैं और कैसे यह धीरे-धीरे मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में बदल सकते हैं।

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