हैदराबाद में सोने में निवेश के नाम पर ₹2.96 करोड़ की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी दंपती ने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर और कानूनी पेशेवर बताकर 11 लोगों को हाई रिटर्न का झांसा दिया।

हैदराबाद में निवेश धोखाधड़ी: ₹2.96 करोड़ के फर्जी गोल्ड स्कीम फ्रॉड में बिजनेसमैन समेत 11 लोग ठगे गए

Team The420
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हैदराबाद:   तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें एक बिजनेसमैन सहित 11 लोगों से कथित तौर पर ₹2.96 करोड़ की ठगी की गई है। आरोप है कि यह पूरा फ्रॉड सोने में निवेश के नाम पर एक फर्जी स्कीम के जरिए किया गया, जिसमें भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया और बाद में आरोपी फरार हो गए।

पड़ोस से शुरू हुआ भरोसे का रिश्ता

शिकायतकर्ता 41 वर्षीय व्यापारी अखिल कुमार जैन के अनुसार, यह धोखाधड़ी उनके एक व्यक्तिगत परिचय से शुरू हुई। जैन ने बताया कि वे पहले डोमलगुडा स्थित गगन महल इलाके में रहते थे, जहां आरोपी पाराग कुमार कसेरवाल भी उनके पड़ोसी थे। पाराग ने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उसकी पत्नी अनुष्री ने खुद को कानूनी पेशेवर (लॉ प्रैक्टिशनर) बताया था। दोनों ने मिलकर इलाके के लोगों का विश्वास हासिल किया और निवेश की पृष्ठभूमि तैयार की।

आरोप है कि इसके बाद दोनों ने जैन को सोने में निवेश की एक स्कीम में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया और अधिक रिटर्न का भरोसा दिलाया। भरोसे में आकर जैन ने अप्रैल से जुलाई 2025 के बीच कुल ₹21.45 लाख का निवेश किया। शुरुआती चरण में स्कीम से जुड़े अपडेट और दिखाए गए रिटर्न ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत कर दिया।

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अक्टूबर 2025 में भुगतान मांगने पर दिए गए बहाने

हालांकि अक्टूबर 2025 में जब जैन ने अपने निवेश पर रिटर्न की मांग की, तो उन्हें बताया गया कि सोने की कीमतों में गिरावट आई है और उन्हें कुछ समय इंतजार करना चाहिए। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि बाद में हुए नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी।

समय बीतने के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तो फरवरी 2026 तक जैन ने लगातार अपनी राशि वापस करने की मांग की। इस दौरान उन्हें बार-बार टालमटोल भरे जवाब दिए गए और अंततः कोई पैसा वापस नहीं किया गया।

तड़के घर छोड़कर फरार हुए आरोपी

मामला तब और गंभीर हो गया जब 28 मार्च 2026 को पाराग कुमार कसेरवाल, उनकी पत्नी अनुष्री और उनकी मां निरमला अचानक तड़के घर छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद जैन को संदेह हुआ और उन्होंने पूरी जांच शुरू की।

जांच के दौरान पता चला कि इसी तरीके से कम से कम 10 अन्य लोगों को भी ठगा गया है, जिससे कुल धोखाधड़ी की राशि बढ़कर ₹2,96,49,683 हो गई। सभी पीड़ितों को व्यक्तिगत संपर्क और भरोसे के आधार पर इस स्कीम में जोड़ा गया था।

बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच

शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। आरोपियों की गतिविधियों और पैसों के लेन-देन के पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया जा रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे और नकली पहचान के जरिए निवेशकों का विश्वास जीतकर उन्हें लंबे समय तक भ्रमित रखा गया। बाद में धन को अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।

अन्य शहरों में भी नेटवर्क की आशंका

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह एक सुनियोजित निवेश फ्रॉड हो सकता है, जिसमें कई स्तरों पर फर्जी खातों और नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य शहरों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की है।

अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे बिना किसी आधिकारिक सत्यापन के अधिक रिटर्न देने वाली निवेश योजनाओं में पैसा न लगाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की स्कीमें अक्सर भरोसे और लालच का फायदा उठाकर लोगों को ठगती हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी वित्तीय लेन-देन और आरोपी नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

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