डेटिंग ऐप्स और मैट्रिमोनियल साइट्स पर सक्रिय गिरोह; भावनात्मक जुड़ाव के बाद ब्लैकमेल और पैसों की मांग, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की चेतावनी

“प्यार के जाल में ठगी का खेल: ‘रोमांस स्कैम’ से बढ़ता खतरा, भरोसा बन रहा सबसे बड़ा हथियार”

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By Roopa
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नई दिल्ली। डिजिटल दौर में जहां रिश्ते बनाना आसान हुआ है, वहीं ऑनलाइन जुड़ाव अब ठगी का खतरनाक जरिया भी बनता जा रहा है। राजधानी दिल्ली में सामने आए एक ताजा मामले ने एक बार फिर ‘रोमांस स्कैम’ के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। इस तरह के मामलों में ठग नकली पहचान के सहारे लोगों—खासतौर पर महिलाओं—को अपने जाल में फंसाते हैं और फिर भावनात्मक व मानसिक दबाव बनाकर उनसे पैसे ऐंठते हैं।

जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से इस ठगी को अंजाम देते हैं। वे डेटिंग ऐप्स और मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर आकर्षक और भरोसेमंद प्रोफाइल बनाते हैं। प्रोफाइल में प्रोफेशनल फोटो, अच्छी नौकरी और प्रभावशाली व्यक्तित्व का झूठा विवरण दिया जाता है, ताकि सामने वाला व्यक्ति जल्दी प्रभावित हो जाए। शुरुआती बातचीत सामान्य दोस्ती के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे इसे भावनात्मक रिश्ते में बदल दिया जाता है।

भरोसा जीतकर शुरू होता है असली खेल

जब पीड़ित पूरी तरह से भरोसा करने लगता है, तब ठग अपने असली इरादे सामने लाते हैं। वे निजी बातचीत के दौरान फोटो, वीडियो या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही उनके पास ऐसा कोई कंटेंट पहुंचता है, वे ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। कई मामलों में पीड़ित सामाजिक बदनामी के डर से बिना शिकायत किए ही पैसे देने को मजबूर हो जाते हैं।

इस तरह की घटनाएं केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी पीड़ितों को गहरी चोट पहुंचाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रोमांस स्कैम में सबसे बड़ा हथियार ‘भावनात्मक विश्वास’ होता है, जिसे ठग बड़ी चालाकी से अपने पक्ष में इस्तेमाल करते हैं।

सोची-समझी रणनीति से होता है अपराध

यह कोई आकस्मिक ठगी नहीं होती, बल्कि एक तय पैटर्न पर काम किया जाता है। पहले दोस्ती, फिर विश्वास, उसके बाद निजी बातचीत और अंत में ब्लैकमेल—यही इन गिरोहों का सामान्य तरीका होता है। कई मामलों में ठग खुद को विदेश में तैनात प्रोफेशनल, बिजनेसमैन या सेना से जुड़ा व्यक्ति बताते हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता और बढ़ जाती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निर्भरता ने इस तरह के अपराधों को और आसान बना दिया है। लोग अक्सर सामने वाले व्यक्ति की पहचान सत्यापित किए बिना ही निजी जानकारी साझा कर देते हैं, जो बाद में उनके लिए खतरा बन जाती है।

रिसर्च में बढ़ते खतरे की पुष्टि

Future Crime Research Foundation की हालिया रिपोर्ट्स में भी यह सामने आया है कि भारत में रोमांस स्कैम के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। संस्था के अनुसार, साइबर अपराधी अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सोशल इंजीनियरिंग और मनोवैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पीड़ितों को पहचानना और भी मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ छोटे शहरों के लोग भी तेजी से इस तरह के अपराधों का शिकार बन रहे हैं।

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विशेषज्ञ की चेतावनी

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh का कहना है कि रोमांस स्कैम पूरी तरह से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर आधारित अपराध है, जहां अपराधी तकनीक से ज्यादा इंसानी भावनाओं का फायदा उठाते हैं। उनके अनुसार, “ठग पहले भरोसा बनाते हैं, फिर उसी भरोसे को हथियार बनाकर लोगों को ब्लैकमेल करते हैं। लोग जितना ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, उतना ही ज्यादा नुकसान झेलते हैं।” उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि ऑनलाइन रिश्तों में सतर्कता और सत्यापन सबसे जरूरी है।

कैसे पहचानें ‘रोमांस स्कैम’ के संकेत?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सामान्य संकेत हैं जिन्हें पहचानकर इस तरह की ठगी से बचा जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति बहुत जल्दी भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश करता है, बार-बार व्यक्तिगत जानकारी मांगता है या किसी बहाने से पैसे की मांग करता है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, प्रोफाइल की जानकारी और व्यवहार में असंगति भी संदेह पैदा करती है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बातचीत करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें, चाहे वह कितना ही आकर्षक या भरोसेमंद क्यों न लगे। निजी फोटो, वीडियो या संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति आप पर भावनात्मक दबाव डालता है या पैसों की मांग करता है, तो तुरंत दूरी बना लें।

यदि किसी को इस तरह के स्कैम का संदेह हो या वह इसका शिकार बन जाए, तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में जहां रिश्तों की परिभाषा बदल रही है, वहीं सतर्क रहना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। याद रखें—हर ऑनलाइन रिश्ता सच्चा नहीं होता, और थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़े नुकसान में डाल सकती है।

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