हैदराबाद में जमीन सौदे के नाम पर एक निजी कंपनी से ₹14.85 करोड़ की कथित ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। साइबराबाद पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में एक बिल्डर और उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि दंपति ने फर्जी जमीन सौदों का झांसा देकर कंपनी से भारी रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई।
जानकारी के अनुसार, मामला वर्ष 2021 का है जब संबंधित निजी कंपनी हैदराबाद में अपने व्यवसाय विस्तार के लिए जमीन खरीदने की योजना बना रही थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने कंपनी की साख और वित्तीय स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उन्हें निशाना बनाया और आकर्षक जमीन सौदों का प्रस्ताव दिया।
आरोप है कि बिल्डर श्रीधर सरनाला और उनकी पत्नी संध्या सरनाला ने खुद को प्राइम लोकेशनों पर जमीन का वैध मालिक बताया। भरोसा कायम करने के लिए उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को जुबली हिल्स स्थित अपने बंगले पर बुलाया और बाद में नानक्रामगुडा स्थित अपने कार्यालय में भी ले गए।
वहां कथित तौर पर उन्हें टीजीएसपीए सर्कल, आउटर रिंग रोड सर्विस रोड (नानक्रामगुडा टोलगेट के पास), एफसीआई सोसाइटी (गाचीबौली) और आसपास के क्षेत्रों की जमीनों के नक्शे और आंशिक दस्तावेज दिखाए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर कंपनी को यह भरोसा दिलाया गया कि सौदे पूरी तरह वैध हैं।
हालांकि बाद में जांच में यह सामने आया कि जिन जमीनों को बेचा जाना बताया गया था, उनमें से कई पर आरोपियों का कोई स्पष्ट स्वामित्व या कानूनी अधिकार नहीं था। कुछ मामलों में जमीन पर पहले से विवाद और अतिक्रमण से जुड़े कानूनी मामले भी लंबित पाए गए।
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शिकायत के अनुसार, जब कंपनी ने बिक्री से पहले पूरा दस्तावेजी सत्यापन, रजिस्टर्ड सेल डीड और एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की मांग की, तो आरोपियों ने बार-बार टालमटोल किया। इसके बजाय उन्होंने “पहले भुगतान करो, बाद में दस्तावेज मिलेंगे” जैसी शर्तें रखीं।
भरोसे में आकर कंपनी ने वर्ष 2021 में आरोपियों के बैंक खातों में सीधे ₹14.85 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भुगतान के बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया और किसी भी बैठक से बचने लगे।
न तो कोई बिक्री समझौता किया गया, न ही कोई संपत्ति कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड हुई और न ही रकम वापस की गई। इसके बाद कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबराबाद EOW ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक लेनदेन, संपत्ति रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि पूरे फर्जीवाड़े की कड़ी सामने लाई जा सके।
इसके साथ ही, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे और क्या यह एक संगठित रियल एस्टेट धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा है।
स्थानीय स्तर पर इस मामले के सामने आने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े लेनदेन से पहले कानूनी जांच और संपत्ति सत्यापन बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आरोपियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
