शिमला में बैंकिंग सिस्टम को चकमा देकर नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर लाखों रुपये का ऋण लेने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक ऑफ इंडिया की मालरोड शाखा में सामने आए इस प्रकरण में कुल ₹34.73 लाख के गोल्ड लोन को फर्जी आभूषणों के आधार पर स्वीकृत कराने का आरोप लगा है। बैंक प्रबंधन की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 से 2023 के बीच अलग-अलग समय पर कई व्यक्तियों ने बैंक से गोल्ड लोन लिया। इन सभी मामलों में आभूषणों के साथ पैनल ज्वेलर के प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किए गए, जिसमें इन्हें 22 कैरेट सोना बताया गया था। बाद में इन आभूषणों के वास्तविक मूल्यांकन में बड़ा खुलासा हुआ।
बैंक की ओर से जब संदेह के आधार पर पुनर्मूल्यांकन कराया गया तो सामने आया कि कई आभूषण नकली हैं या उनमें सोने की मात्रा मानक से बेहद कम है। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने संबंधित ग्राहकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए, लेकिन अधिकांश ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और न ही लोन की राशि चुकाई।
इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत 16 अप्रैल को बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक एवं शाखा प्रभारी द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने जानबूझकर फर्जी सोने के आभूषण गिरवी रखकर बैंक से ऋण लिया और सार्वजनिक धन का गलत उपयोग किया।
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मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें अंकिता कुमार, इंद्र जस्टा, वासुदेव पाठक, तानिया, लीला देवी और सोनू कुमार गुप्ता शामिल हैं। आरोप है कि इन सभी ने अलग-अलग मात्रा में आभूषण गिरवी रखकर लाखों रुपये के लोन प्राप्त किए।
रिकॉर्ड के अनुसार अंकिता कुमार ने लगभग 198.600 ग्राम आभूषणों के आधार पर ₹6.63 लाख का ऋण लिया। इंद्र जस्टा ने 100 से 115 ग्राम आभूषणों के आधार पर दो अलग-अलग लोन लिए, जिनकी राशि ₹4.50 लाख और ₹5.25 लाख रही। वासुदेव पाठक ने लगभग 182.660 ग्राम आभूषण गिरवी रखकर ₹8.20 लाख का ऋण प्राप्त किया।
इसी तरह तानिया ने 69.10 ग्राम आभूषणों के आधार पर ₹2.60 लाख और लीला देवी ने 84.25 ग्राम आभूषणों पर ₹2.05 लाख का लोन लिया था। बाद में जांच में इन आभूषणों का बड़ा हिस्सा नकली पाया गया। वहीं एक अन्य मामले में सोनू कुमार गुप्ता ने ₹5.50 लाख का ऋण लिया था, जिसे उन्होंने बाद में चुका दिया बताया गया है।
जांच में यह भी सामने आ रहा है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से बैंकिंग सिस्टम को धोखा देकर सरकारी धन निकालने की कोशिश कर रहा था। बैंक ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी मानते हुए जांच एजेंसियों को सूचित किया है।
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और ज्वेलरी मूल्यांकन दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में ज्वेलर या अन्य कोई तीसरा पक्ष शामिल था या नहीं।
स्थानीय स्तर पर इस घटना के सामने आने के बाद बैंकिंग सुरक्षा और गोल्ड लोन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त निगरानी की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और सभी आरोपियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
