उडुपी। कर्नाटक के उडुपी जिले से एक बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक 35 वर्षीय मणिपाल के उद्यमी ने सिंगापुर स्थित कंपनी और उसके शीर्ष अधिकारियों पर लगभग ₹33 करोड़ की ठगी का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर मणिपाल पुलिस ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता दिलीप आर अडिगा, जो लक्ष्मींद्र नगर, मणिपाल में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक हैं, ने बताया कि उन्हें सिंगापुर की Infomo Global Pvt Ltd के CEO आनंद राव द्वारा संपर्क किया गया था। कंपनी ने उनके द्वारा विकसित CMS (Content Management System) प्रोडक्ट को खरीदने में रुचि दिखाई थी।
शुरुआती बातचीत फोन कॉल और ईमेल के माध्यम से हुई, जिसमें प्रोडक्ट के मूल्यांकन और संभावित सौदे पर चर्चा की गई। शिकायत के अनुसार, आनंद राव ने ₹35 लाख नकद के साथ 17.5 लाख शेयर देने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ यह भी दावा किया गया कि इन शेयरों का मूल्य अगले तीन वर्षों में बढ़कर लगभग ₹33 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि कंपनी का कुल मूल्यांकन ₹9,000 करोड़ तक जाने की संभावना जताई गई थी।
इन आश्वासनों के आधार पर दोनों पक्षों के बीच 5 अप्रैल 2020 को एक औपचारिक समझौता हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस समझौते में कंपनी की वित्तीय स्थिति और शेयर संरचना को लेकर भी भ्रामक जानकारी दी गई थी, जिसमें यह दावा किया गया कि उस समय कंपनी के पास 35 मिलियन शेयर मौजूद थे।
समझौते के बाद अडिगा ने CMS प्रोडक्ट कंपनी को सौंप दिया और अनुबंध के अनुसार कार्य भी शुरू किया। अनुबंध की अवधि 6 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गई, लेकिन शिकायत के अनुसार निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी न तो नकद भुगतान किया गया और न ही शेयर हस्तांतरित किए गए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में आनंद राव ने एक शेयरधारक श्यामदीप को ईमेल भेजकर समझौते से जुड़ी कुछ शर्तों की पुष्टि की थी। इसके अलावा एक मध्यस्थ के माध्यम से हुई बातचीत में ₹6.9 करोड़ नकद और अतिरिक्त शेयर देने का आश्वासन भी दिया गया, जो बाद में पूरा नहीं हुआ।
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अडिगा ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित धोखाधड़ी का हिस्सा थी, जिसमें उन्हें झूठे वादों और बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए मूल्यांकन के आधार पर समझौते के लिए प्रेरित किया गया। शिकायत में कई लोगों के नाम शामिल हैं, जिनमें CEO आनंद राव, चेयरमैन पीटर जापरी जर्मेन, CTO राघवेंद्र अग्रवाल, डायरेक्टर स्मिता साहू और बोर्ड मेंबर आशुतोष श्रीवास्तव शामिल हैं।
मणिपाल पुलिस ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, अनुबंध दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बीच हुई डिजिटल संचार सामग्री की गहन जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां ईमेल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही हैं ताकि दोनों पक्षों के दावों की सत्यता स्थापित की जा सके। मामला एक जटिल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विवाद के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और कंपनी मूल्यांकन से जुड़े पहलू शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने से जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जहां विदेशी कंपनियों के साथ उच्च मूल्यांकन पर समझौते किए जाते हैं, वहां विवाद की संभावना बनी रहती है। हालांकि, यदि यह साबित होता है कि जानबूझकर गलत जानकारी देकर धोखा दिया गया, तो यह गंभीर आपराधिक अपराध की श्रेणी में आएगा।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस सौदे के कारण उन्हें भारी आर्थिक और पेशेवर नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
पुलिस ने संकेत दिया है कि नामजद व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है, जिनमें विदेश में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। फिलहाल जांच यह भी तय करेगी कि यह मामला केवल एक व्यावसायिक विवाद है या किसी बड़े संगठित वित्तीय धोखाधड़ी पैटर्न का हिस्सा है।
