हैदराबाद। देश में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक के तहत हैदराबाद सिटी पुलिस ने “ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0” के तहत 52 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 32 बैंक कर्मचारी, 15 म्यूल अकाउंट धारक और 5 बिचौलिए शामिल हैं। यह कार्रवाई नौ राज्यों में एक साथ चलाए गए सात दिवसीय समन्वित अभियान के बाद सामने आई, जिसने एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों और अंदरूनी सहयोग के जरिए देशभर में सक्रिय था। गिरफ्तार बैंक कर्मियों में शाखा प्रबंधक, रिलेशनशिप मैनेजर, केवाईसी अधिकारी, फील्ड स्टाफ और क्लेरिकल कर्मचारी शामिल हैं, जो कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर फर्जी खाते खोलने और उन्हें सक्रिय करने में मदद कर रहे थे।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह करीब 850 साइबर अपराध मामलों से जुड़ा हो सकता है, जिनमें लगभग ₹150 करोड़ की अवैध लेन-देन राशि शामिल है। इन मामलों में निवेश धोखाधड़ी, फर्जी ट्रेडिंग स्कीम और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर फ्रॉड शामिल हैं, जिनमें पीड़ितों को डराकर या भ्रमित कर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।
अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क में करीब 350 बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर घुमाने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कई बैंक अधिकारियों ने केवाईसी और सत्यापन प्रक्रियाओं को नजरअंदाज करते हुए म्यूल अकाउंट खोलने में मदद की, जिससे फर्जी लेन-देन को आसान बनाया जा सके।
इस कार्रवाई में जिन बैंकों के कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें इंडसइंड बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, फेडरल बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कर्नाटक बैंक, करूर वैश्य बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि म्यूल अकाउंट धारक अपने खातों को पैसे के बदले साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। वहीं बिचौलिए इन खातों को इकट्ठा कर बड़े नेटवर्क तक पहुंचाते थे, जिससे अवैध धन का प्रवाह लगातार चलता रहता था और ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने 26 मोबाइल फोन, 14 चेकबुक, दो पेन ड्राइव, एक लैपटॉप और 21 मुहरें बरामद की हैं, जो शेल कंपनियों से जुड़ी हुई थीं। अधिकारियों के अनुसार, ये दस्तावेज और उपकरण इस बात का संकेत देते हैं कि अपराधी एक संगठित ढांचे के तहत फर्जी कंपनियों और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे।
हैदराबाद पुलिस आयुक्त ने कहा है कि इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे बैंक कर्मचारी हों या अन्य सहयोगी। उन्होंने यह भी बताया कि जांच अभी जारी है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद और गिरफ्तारियां संभव हैं।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका तय थी—बैंक कर्मचारी खाता खोलने में मदद करते थे, बिचौलिए खाते जुटाते थे और म्यूल अकाउंट धारक लेन-देन को अंजाम देते थे।
अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मामले डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में बढ़ते खतरे की ओर इशारा करते हैं, जहां आंतरिक पहुंच और प्रक्रिया की खामियों का फायदा संगठित अपराधी उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त ऑडिट और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम की आवश्यकता है।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड किसी को भी उपयोग के लिए न दें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग जानकारी साझा न करें। साथ ही, साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के बाकी लिंक तलाशने, बचे हुए धन की ट्रेसिंग करने और अन्य संभावित बैंकिंग संस्थानों की भूमिका की जांच में जुटी हुई हैं।
