गुरुग्राम। हरियाणा के Gurugram में शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। EDUCREST International School की प्रिंसिपल को Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) से फर्जी संबद्धता दिखाकर छात्रों से धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि स्कूल ने खुद को सीबीएसई से मान्यता प्राप्त बताया, जबकि वास्तविकता में उसे कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली थी।
यह मामला तब उजागर हुआ जब कक्षा 10 की एक छात्रा को बोर्ड परीक्षा के दौरान एडमिट कार्ड नहीं मिला। इसके बाद छात्रा ने सेक्टर-9ए थाने में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
एडमिट कार्ड न मिलने से खुला राज
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रों और उनके अभिभावकों को लंबे समय तक यह भरोसा दिलाया गया कि स्कूल पूरी तरह से सीबीएसई से संबद्ध है और सभी छात्रों को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराया जाएगा। लेकिन परीक्षा के समय एडमिट कार्ड जारी न होने पर शक गहराया।
अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से जवाब मांगा, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। जांच में सामने आया कि स्कूल ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीबीएसई संबद्धता का दावा किया था और उसी आधार पर दाखिले लिए जा रहे थे।
गुजरात से गिरफ्तारी, जांच तेज
एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी प्रिंसिपल रिद्धिमा कटारिया फरार होकर गुजरात चली गई थी। पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक की और उसे वहां से गिरफ्तार कर गुरुग्राम लाया गया।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि स्कूल ने कई छात्रों से फीस और अन्य शुल्क के नाम पर बड़ी रकम वसूली।
कितने छात्र प्रभावित, जांच जारी
अधिकारियों द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि इस फर्जी मान्यता के चलते कितने छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक, कई बैच के छात्र इस स्कूल में पढ़ रहे थे और सभी को सीबीएसई बोर्ड से पढ़ाई का भरोसा दिया गया था।
अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने बच्चों के भविष्य को देखते हुए स्कूल पर भरोसा किया, लेकिन अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी क्षमता से अधिक फीस देकर बच्चों का दाखिला कराया था।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने निजी स्कूलों की मान्यता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर सत्यापन और निरीक्षण की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
शिक्षा विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि किसी भी स्कूल में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता और संबद्धता की आधिकारिक जांच जरूर करें। केवल विज्ञापन या दावे के आधार पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक विश्वासघात जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच के दौरान यदि और सबूत मिलते हैं, तो अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं और अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में समायोजन पर विचार किया जा रहा है।
अभिभावकों के लिए चेतावनी
यह मामला अभिभावकों के लिए एक बड़ा सबक है कि बच्चों के दाखिले से पहले स्कूल की मान्यता की जांच आधिकारिक वेबसाइट पर अवश्य करें।
गुरुग्राम की इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी फर्जीवाड़ा संभव है, और थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के पूरे करियर को खतरे में डाल सकती है।
