शेयर ट्रेडिंग, हनीट्रैप और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर में फैला था साइबर ठगों का संगठित नेटवर्क, तीन महीनों में दर्जनों बैंक खातों के जरिए हुआ करोड़ों का संदिग्ध ट्रांजैक्शन

₹80 करोड़ का म्यूल अकाउंट साइबर फ्रॉड: मोची के खाते से घूमा ठगी का जाल, पंजाब से दो गिरफ्तार, 656 शिकायतों से खुला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

Roopa
By Roopa
4 Min Read

कानपुर। देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक मोची के बैंक खाते का इस्तेमाल कर लगभग 80 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों ने पंजाब से दो आरोपियों को पकड़ा है, जिनकी भूमिका म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने और पूरे ट्रांजैक्शन नेटवर्क को चलाने में सामने आई है। इस खाते से जुड़े देशभर में 656 शिकायतें और 13 आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं, जिससे इस नेटवर्क की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा रहा है।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी ट्रेडिंग एप, गेमिंग स्कीम, हनीट्रैप और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे तरीकों से लोगों को जाल में फंसाता था। पहले छोटे निवेश पर मुनाफा दिखाकर भरोसा बनाया जाता, फिर वीडियो कॉल और धमकी भरे संदेशों के जरिए पीड़ितों को मानसिक दबाव में लेकर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। ठगी की रकम को कई परतों में विभिन्न बैंक खातों में घुमाया जाता था और अंत में इसे एक मोची के चालू खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि पैसे के स्रोत को छिपाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करण कसेरा और गुलशन के रूप में हुई है, जो पंजाब के फाजिल्का जिले के निवासी बताए गए हैं। इनके पास से मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, चेकबुक और एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया कि ये दोनों लोग अपने और परिचितों के बैंक खाते किराए पर उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले उन्हें 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। कई मामलों में कमीशन आधारित सिस्टम के तहत 10 से 30 प्रतिशत तक हिस्सा भी दिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि इन आरोपियों के खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ, जिस पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया था। संदिग्ध ट्रांजैक्शन और लग्जरी जीवनशैली ने यह संकेत दिया कि ठगी की रकम का उपयोग संपत्ति और अन्य अवैध निवेश में किया गया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

एक वरिष्ठ साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की सबसे कमजोर लेकिन सबसे खतरनाक कड़ी है। अपराधी आम लोगों को मामूली कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते को डिजिटल अपराध का केंद्र बना देते हैं। जब तक बैंकों और आम नागरिकों में जागरूकता नहीं बढ़ेगी, ऐसे नेटवर्क लगातार फैलते रहेंगे।”

ठगी की रकम पहले कई बैंकों के खातों में ट्रांसफर होती थी और फिर अंतिम रूप से मोची अजय कुमार के खाते में पहुंचाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि इस खाते में सीधे केवल लगभग 50 हजार रुपये ही पीड़ित से आए थे, जबकि बाकी रकम कई लेयर में घुमाकर डाली गई थी। तीन महीनों में इस खाते से करीब 80 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजैक्शन दर्ज हुआ।

जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हैं। पड़ोसी देशों समेत कई विदेशी लोकेशनों से भी इस गिरोह से जुड़े खातों में धनराशि ट्रांसफर होने के संकेत मिले हैं, जिससे यह मामला केवल घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा प्रतीत होता है।

फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां बैंकिंग सिस्टम, डिजिटल ट्रांजैक्शन पैटर्न और पूरे मनी फ्लो की गहराई से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस साइबर नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article