डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में CBI की तेलंगाना-आंध्र छापेमारी में बैंक अधिकारी समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड पर CBI की बड़ी कार्रवाई: तेलंगाना–आंध्र में छापेमारी, बैंक अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

हैदराबाद। देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर फ्रॉड मामलों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पांच स्थानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक बैंक अधिकारी भी शामिल है। मामला एक वरिष्ठ नागरिक से जुड़े ₹1.6 करोड़ के साइबर ठगी केस से संबंधित बताया जा रहा है।

CBI अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई जांच का हिस्सा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ित वरिष्ठ नागरिक को फर्जी जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लगातार मानसिक दबाव में रखा गया और “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देकर बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को एक कंपनी के नाम पर खोले गए फर्जी बैंक खाते के माध्यम से रूट किया गया था। इस खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध से अर्जित धन को प्राप्त करने और आगे विभिन्न चैनलों में ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों ने इसे एक संगठित वित्तीय नेटवर्क बताया है, जिसमें कई स्तरों पर पैसे की “लेयरिंग” की गई थी ताकि ट्रांजेक्शन का स्रोत छिपाया जा सके।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में इंडसइंड बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है। आरोप है कि उसने फर्जी तरीके से बैंक खाता खोलने में मदद की और आवश्यक बैंकिंग प्रक्रियाओं की अनदेखी की। इसके अलावा अन्य दो आरोपी म्यूल बैंक अकाउंट्स की व्यवस्था करने और अवैध धन के ट्रांसफर व वितरण में सक्रिय रूप से शामिल थे।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इन सामग्रियों की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें और अन्य जुड़े हुए लोगों की पहचान हो सके। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम करता था और साइबर फ्रॉड की रकम को कई खातों में घुमाकर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश करता था।

CBI ने इस मामले में एक सार्वजनिक चेतावनी भी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है और यह केवल साइबर ठगों द्वारा लोगों को डराने का एक तरीका है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की कॉल या संदेश, जिसमें पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाया जाए, उस पर तुरंत विश्वास न करें।

साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही नई तकनीकों को देखते हुए विशेषज्ञों ने इसे गंभीर खतरा बताया है। इस मामले में साइबर फ्रॉड के तरीके न केवल तकनीकी रूप से उन्नत थे, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। वरिष्ठ नागरिक को लगातार गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर मानसिक रूप से अस्थिर किया गया, जिसके बाद उन्होंने बड़ी राशि ट्रांसफर कर दी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अन्य राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय लिंक भी हो सकते हैं। फिलहाल बैंकिंग सिस्टम में मिली खामियों और म्यूल अकाउंट नेटवर्क की गहन जांच जारी है।

इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराधी तकनीक और भय दोनों का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार “डिजिटल अरेस्ट जैसे फर्जी कानूनी डर और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर अपराधी मिनटों में लोगों की जीवन भर की जमा पूंजी निकाल लेते हैं।”

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं

हमसे जुड़ें

Share This Article