₹147 करोड़ नगर निगम फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले में पूर्व बैंक वाइस-प्रेसिडेंट न्यायिक हिरासत में, मनी ट्रेल जांच तेज हुई

₹147-करोड़ नगर निगम फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाला: बैंकिंग सिस्टम हिला, पूर्व बैंक वाइस-प्रेसिडेंट न्यायिक हिरासत में

Team The420
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पंचकूला। नगर निगम के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े ₹147 करोड़ के बड़े वित्तीय घोटाले ने बैंकिंग और प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। इस मामले में एक निजी बैंक के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को लंबी पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

आरोपी पुष्पेन्द्र सिंह, जो पहले पंचकूला के सेक्टर-11 स्थित एक निजी बैंक शाखा में डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत था, पर नगर निगम के फंड की बड़ी राशि के कथित गबन का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए किए गए फंड के सिस्टमेटिक दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है, जिसमें बैंकिंग ट्रांजैक्शन में हेराफेरी कर सार्वजनिक धन को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने इस घोटाले से लगभग ₹30 करोड़ से ₹35 करोड़ तक की व्यक्तिगत हिस्सेदारी हासिल की। इसी अवैध धन का इस्तेमाल कथित रूप से लग्जरी संपत्तियों की खरीद में किया गया, जिनमें जीप रैंगलर रुबिकॉन, मर्सिडीज GLS SUV और हार्ले-डेविडसन जैसी महंगी बाइक शामिल हैं। इन सभी संपत्तियों को अब जांच के दायरे में रखा गया है।

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आरोपी, जिसकी उम्र 41 वर्ष बताई गई है और जो सेक्टर-2 पंचकूला का निवासी है, ने पहले एंटी-करप्शन ब्यूरो के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।

यह मामला नगर निगम द्वारा किए गए फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश से जुड़ा है, जिन्हें कथित रूप से बैंकिंग सिस्टम में हेराफेरी कर गलत तरीके से डायवर्ट किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे खेल में आंतरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं में गंभीर गड़बड़ियां और नियंत्रण की कमी रही हो सकती है।

जांच एजेंसियां अब पूरे मनी ट्रेल को ट्रैक करने में जुटी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग लाभार्थी रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक व्यापक नेटवर्क भी सक्रिय हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, फॉरेंसिक वित्तीय जांच के तहत बैंक खातों के स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन लॉग और संपत्ति खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि अवैध धन को किन-किन चरणों में घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाई गई।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या किसी अन्य बैंक कर्मचारी या बाहरी एजेंट की भूमिका इस पूरे सिस्टम में शामिल थी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी स्तर पर सॉफ्टवेयर या प्रोसेसिंग में जानबूझकर बदलाव किए गए।

इस खुलासे के बाद बैंकिंग सेक्टर में आंतरिक अनुपालन और ऑडिट सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में छोटे स्तर की लापरवाही भी बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है।

फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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