मोहाली। ज़ीरकपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित ऑनलाइन लोन फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो कथित रूप से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर ठगी कर रहा था। इस कार्रवाई में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो किराए के फ्लैट्स से बैठकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी लोन ऑफर के जरिए लोगों से पैसे ऐंठते थे।
जानकारी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी विदेशों में रहने वाले लोगों से ऑनलाइन कॉल और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करते थे और उन्हें बेहद कम ब्याज दर पर लोन देने का झांसा देते थे। भरोसा जीतने के बाद पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, एडवांस चार्ज और अन्य फर्जी शुल्क विदेशी मुद्रा में वसूले जाते थे। इसके बाद न तो कोई लोन दिया जाता था और न ही रकम वापस होती थी।
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जांच में सामने आया है कि यह पूरा गिरोह ज़ीरकपुर के अलग-अलग किराए के फ्लैट्स से संचालित हो रहा था, जिनमें माया गार्डन और मोटियाज सिटी जैसे रिहायशी इलाके शामिल हैं। आरोपी अलग-अलग भूमिकाओं में बंटे हुए थे—कुछ कॉल कर पीड़ितों को फंसाते थे, कुछ उन्हें भरोसा दिलाते थे और बाकी लोग पैसों के ट्रांजैक्शन और तकनीकी संचालन को संभालते थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों को उसी समय पकड़ लिया जब वे विदेशी नागरिकों को फर्जी कॉल कर रहे थे। मौके से 9 लैपटॉप और 10 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिन्हें अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इन डिवाइसों से कई देशों के पीड़ितों से जुड़े डिजिटल सबूत, चैट रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
पुलिस ने इस गिरोह के कथित सरगना के रूप में मेल्विन ठाकुर की पहचान की है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में अनिरुद्ध पल्हानिया, अनंत देव कौशिक, पवन पांडेवर, सोनू दियाली, मिलन सुनवार, आशिक दर्जी, अर्जुन शेर्पा, प्रशांत ओम प्रकाश जायसवाल और पलविंदर सिंह शामिल हैं। सभी से पूछताछ जारी है ताकि पूरे नेटवर्क और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और पहचान छिपाने के लिए बार-बार स्थान बदलता था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है और कई देशों में इसके शिकार लोग मौजूद हो सकते हैं।
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे गिरोह सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल विश्वास का दुरुपयोग कर लोगों को फंसाते हैं। उन्होंने कहा, “आज के साइबर फ्रॉड पूरी तरह मनोवैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित हैं, जहां अपराधी भरोसा जीतकर धीरे-धीरे आर्थिक शोषण करते हैं। विदेशी नागरिकों को निशाना बनाना इन गिरोहों की नई रणनीति बन चुकी है।”
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अब जांच का फोकस मनी ट्रेल पर है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन खातों और देशों में ट्रांसफर की गई।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क तेजी से बढ़ रहे हैं और शहरी क्षेत्रों के किराए के फ्लैट अब इनके ऑपरेशन सेंटर बनते जा रहे हैं। यह मामला एक बार फिर साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करता है।
जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस नेटवर्क के अन्य लिंक तलाशने में जुटी हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन आरोपियों के संपर्क किसी अन्य बड़े साइबर सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट से कई नए सुराग मिलने की संभावना है।
अधिकारियों ने लोगों को ऐसे ऑनलाइन लोन ऑफर से सतर्क रहने और किसी भी अग्रिम भुगतान से बचने की सलाह दी है।
