चंडीगढ़ में WhatsApp पर MD बनकर भेजे गए फर्जी संदेश के जरिए कंपनी से ₹1.96 करोड़ की कॉरपोरेट साइबर ठगी हुई

एक मैसेज और करोड़ों साफ: WhatsApp इम्पर्सनेशन से कंपनी को ₹1.96 करोड़ का झटका

Team The420
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चंडीगढ़। डिजिटल युग में जहां संचार के साधन तेज और आसान हुए हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीकों को बेहद परिष्कृत बना लिया है। चंडीगढ़ से सामने आया एक ताजा मामला इस खतरे को और गहराई से उजागर करता है, जहां एक निजी कंपनी को WhatsApp इम्पर्सनेशन के जरिए करीब ₹1.96 करोड़ की चपत लग गई। यह घटना न केवल कॉरपोरेट सेक्टर के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि एक छोटी सी चूक किस तरह बड़े आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।

मामले के अनुसार, कंपनी के अकाउंट्स अधिकारी को एक WhatsApp मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें भेजने वाले ने खुद को कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बताया। मैसेज में एक जरूरी और तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया गया। चूंकि मैसेज में MD का नाम और प्रोफाइल फोटो दोनों दिखाई दे रहे थे, इसलिए अकाउंट्स अधिकारी को इस पर कोई संदेह नहीं हुआ और उन्होंने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर दी।

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जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। साइबर अपराधियों ने पहले कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी की पहचान को क्लोन किया और फिर एक अलग मोबाइल नंबर से WhatsApp प्रोफाइल बनाकर उसी नाम और फोटो का इस्तेमाल किया। इस तरह उन्होंने पूरी तरह से असली पहचान का भ्रम पैदा किया और कर्मचारियों का भरोसा जीत लिया।

घटना 15 अप्रैल की बताई जा रही है, जब अकाउंट्स विभाग को यह संदेश मिला। मैसेज में भुगतान को “अर्जेंट” बताते हुए तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया। वरिष्ठ अधिकारी के नाम और दबाव के कारण बिना किसी अतिरिक्त पुष्टि के रकम ट्रांसफर कर दी गई। बाद में जब वास्तविक MD से संपर्क किया गया, तब इस पूरे साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

पीड़ित कंपनी की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह एक क्लासिक “इम्पर्सनेशन फ्रॉड” है, जिसमें अपराधी किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान बनाकर वित्तीय लेनदेन करवाते हैं।

जांच एजेंसियां अब उस बैंक खाते की जानकारी जुटाने में लगी हैं, जिसमें पैसे ट्रांसफर किए गए। साथ ही मोबाइल नंबर, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि इस घटना के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो पहले से कंपनियों के आंतरिक ढांचे और अधिकारियों की जानकारी इकट्ठा करता है।

इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज के साइबर अपराध पूरी तरह सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित हैं। अपराधी पहले अपने टारगेट की प्रोफाइलिंग करते हैं और फिर भरोसेमंद पहचान बनाकर मानसिक दबाव तैयार करते हैं। कॉरपोरेट सेक्टर में ‘CEO फ्रॉड’ तेजी से बढ़ रहा है, जहां एक मैसेज के जरिए लाखों-करोड़ों रुपये निकलवा लिए जाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि कंपनियों को अब अपने वित्तीय सिस्टम में मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन अपनाना होगा। किसी भी बड़े भुगतान से पहले कॉल-बैक या अन्य माध्यम से पुष्टि अनिवार्य की जानी चाहिए, ताकि इस तरह के फ्रॉड को रोका जा सके।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, WhatsApp और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर इम्पर्सनेशन फ्रॉड के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। अपराधी अब केवल नाम और फोटो ही नहीं, बल्कि भाषा और बातचीत के तरीके की भी नकल करते हैं, जिससे असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि डिजिटल लेनदेन में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। कंपनियों और व्यक्तियों को किसी भी अनपेक्षित या संदिग्ध वित्तीय निर्देश पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है। यह मामला अन्य कंपनियों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि जागरूकता और सतर्कता का भी विषय है।

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