लंदन। विश्व की प्रतिष्ठित दौड़ प्रतियोगिताओं में शामिल लंदन मैराथन से पहले साइबर ठगों ने एक नया जाल बिछा दिया है। इस बार निशाने पर वे लोग हैं जो आधिकारिक बैलेट प्रक्रिया में जगह नहीं बना सके और किसी भी तरह इस प्रतिष्ठित रेस में हिस्सा लेना चाहते हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी टिकट और एंट्री बेचने के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी देखी जा रही है, जिससे प्रतिभागियों के बीच चिंता बढ़ गई है।
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, ठग खुद को पहले से रजिस्टर्ड प्रतिभागी बताकर दावा करते हैं कि वे किसी कारणवश दौड़ में हिस्सा नहीं ले पाएंगे और अपनी एंट्री किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर करना चाहते हैं। इसके बदले वे £79 (करीब ₹8,200) की मांग करते हैं, जो कि वास्तविक एंट्री फीस के बराबर होती है। यही समानता लोगों को भ्रमित करती है और ठगी को विश्वसनीय बना देती है।
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हाल ही में एक रनिंग ऐप के डिस्कशन ग्रुप में ऐसा ही एक मामला सामने आया। एक यूजर ने चोट का हवाला देते हुए अपनी मैराथन एंट्री बेचने की पेशकश की। बातचीत को WhatsApp पर शिफ्ट किया गया, जहां उसने तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया और दावा किया कि रजिस्ट्रेशन डिटेल्स को ऑनलाइन आसानी से बदला जा सकता है। हालांकि, बाद में यह साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड था, जिसका उद्देश्य केवल पैसे ऐंठना था।
मैराथन के आधिकारिक आयोजकों ने इस तरह के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में एंट्री ट्रांसफर या बेची नहीं जा सकती। आयोजकों ने साफ कहा है कि “यह पूरी तरह झूठ है कि लंदन मैराथन की एंट्री किसी और को ट्रांसफर की जा सकती है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह नियम प्रतिभागियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य मानकों और प्रशासनिक कारणों से लागू किया गया है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फ्रॉड में कुछ सामान्य संकेत होते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। ठग अक्सर गलत या टूटी-फूटी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, संदेश अस्पष्ट होते हैं और तुरंत निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता है। उदाहरण के तौर पर एक संदेश में लिखा गया—“Hello everybody I’m still looking to sell my ticket… I it and would like to transfer my registration।” इस तरह की भाषा संभावित ठगी का संकेत हो सकती है।
इसके अलावा, ठग भुगतान के लिए बैंक ट्रांसफर पर जोर देते हैं, क्योंकि इस माध्यम में उपभोक्ता सुरक्षा बहुत सीमित होती है। क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तुलना में बैंक ट्रांसफर के जरिए भेजी गई रकम को वापस पाना बेहद कठिन होता है, जिससे पीड़ितों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
ऑनलाइन फिटनेस प्लेटफॉर्म और समुदाय भी इस खतरे को लेकर सतर्क हो गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि में शामिल अकाउंट्स को तुरंत निलंबित किया जाएगा। साथ ही यूजर्स से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल या ऑफर की तुरंत रिपोर्ट करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ठगी पूरी तरह “सोशल इंजीनियरिंग” पर आधारित है, जिसमें लोगों की भावनाओं और इच्छाओं का फायदा उठाया जाता है। लंदन मैराथन जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भाग लेने की इच्छा ही ठगों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन रही है।
यदि कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म और साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए। साथ ही सभी चैट, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और अन्य सबूत सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि जांच में मदद मिल सके।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। खासकर बड़े आयोजनों से पहले ऐसे फ्रॉड तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए किसी भी अनधिकृत ऑफर या शॉर्टकट के लालच में आने से बचना चाहिए।
मैराथन आयोजकों ने प्रतिभागियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही पंजीकरण करें और किसी भी संदिग्ध ऑफर से दूर रहें। जैसे-जैसे आयोजन की तारीख नजदीक आ रही है, साइबर ठगों की सक्रियता भी बढ़ रही है—ऐसे में जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।
