गाजियाबाद। उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े एक अहम फैसले में गाजियाबाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने FIITJEE कोचिंग संस्थान पर सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने संस्थान पर पूरी फीस लेने के बावजूद निर्धारित अवधि तक कोचिंग सेवा पूरी न देने का आरोप सही मानते हुए आर्थिक दंड लगाया है और रिफंड, ब्याज तथा मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
यह मामला राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव निवासी अरविंद दोहरे द्वारा दायर किया गया था। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने अपने बेटे तन्यम को IIT-JEE की तैयारी के लिए 2 फरवरी 2023 को 36 महीने के कोचिंग प्रोग्राम में दाखिल कराया था। कुल फीस ₹4,29,350 तय थी, जिसमें से ₹3,91,590 पहले ही जमा कर दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि कोचिंग संस्थान ने केवल जनवरी 2025 तक लगभग 21 महीनों तक ही कक्षाएं संचालित कीं, जबकि तय अवधि 36 महीने की थी। इसके बाद अचानक कक्षाएं बंद कर दी गईं, जिससे छात्र की पढ़ाई प्रभावित हुई और उसे गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
परिवादी ने आयोग से ₹1,41,136 की वापसी के साथ 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और ₹2 लाख मानसिक क्षतिपूर्ति की मांग की थी। उनका कहना था कि कोर्स अधूरा रहने से बेटे की तैयारी प्रभावित हुई और उसे भावनात्मक व शैक्षणिक नुकसान हुआ।
दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर, सदस्य शैलजा सचान और आर.पी. सिंह की पीठ ने माना कि संस्थान ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जब किसी निश्चित अवधि के कोर्स के लिए फीस ली जाती है, तो सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी होती है कि वह पूरी सेवा उपलब्ध कराए।
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आयोग ने अपने आदेश में FIITJEE को ₹84,980 का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा, जो शिकायत दर्ज होने की तारीख से अंतिम भुगतान तक लागू रहेगा। इसके अलावा ₹10,000 मानसिक उत्पीड़न और शैक्षणिक नुकसान के लिए अतिरिक्त मुआवजा भी तय किया गया है।
यह मामला एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर में कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, जहां फीस लेने के बाद सेवाओं में कमी, बैच बंद होने और रिफंड विवादों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में पहले भी ऐसे कई मामलों को लेकर अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं।
सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि शिक्षा संस्थान केवल व्यावसायिक इकाई नहीं हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए फीस लेने के बाद सेवा पूरी करना अनिवार्य है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
मामले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्पष्ट किया गया है कि अनुबंध के अनुसार सेवा न देने पर संस्थानों को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा।
आयोग ने संस्थान को आदेश का पालन निर्धारित समय में करने को कहा है और चेतावनी दी है कि अनुपालन न होने पर आगे और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला कोचिंग सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही अब अनिवार्य होगी।
